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हादसों के बाद याद आते हैं ब्लैक स्पॉट, फिर फाइल बंद

Wed, 25 May 2016 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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लोक निर्माण विभाग की जिम्मेवारी होती है कि वह स्पॉट को दुरुस्त करे। - फोटो : डेमो पिक
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सड़क हादसे होते हैं तो सरकार को हर बार याद आते हैं ब्लैक स्पॉट। लेकिन थोड़ा वक्‍त बीतता है तो फाइल बंद कर दी जाती है। हद तो यह है कि जिन महकमों को सरकार ने ब्लैक स्पॉट की जिम्‍मेदारी सौंपी है, उनमें तालमेल ही नहीं। लोक निर्माण विभाग और पुलिस महकमा दोनों ही अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं।
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वास्तविक स्थिति यह है कि जब भी कोई हादसा होता है तो सबसे पहले पुलिस पहुंचती है। मौके का निरीक्षण करने के बाद स्पॉट की जानकारी लोक निर्माण विभाग को दी जाती है। लोक निर्माण विभाग की जिम्मेवारी होती है कि वह स्पॉट को दुरुस्त करे। लेकिन हिमाचल में कुछेक स्पॉट को ठीक किया गया है जबकि अधिकांश को ठीक नहीं किया जा रहा है। ब्लैक स्पॉट को चिह्नित करने के लिए कमेटी का गठन भी किया गया था।

इस कमेटी में लोक निर्माण विभाग, परिवहन और पुलिस महकमे के लोग शामिल थे। वर्ष 2006-07 में ब्लैक स्पॉट को लेकर हुए सर्वे में 536 ऐसे प्वाइंट चिह्नित किए गए जहां बड़े हादसे हुए हैं और उन प्वाइंट को ठीक करने की जरूरत थी। वर्ष 2013 में हुए सर्वे के मुताबिक 314 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए, जिनमें अधिकांश स्पॉट ठीक नहीं हुए हैं।
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सड़कों पर नहीं लग रहे क्रैश बैरियर
हिमाचल में अधिकांश सड़कें ऐसी हैं, जहां पर लोक निर्माण विभाग ने क्रैश बैरियर नहीं लगाए हैं। जानकारों की मानें तो क्रैश बैरियर लगाए जाने से भी हादसों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

पुलिस और लोक निर्माण विभाग दोनों ब्लैक स्पॉट चिह्नित करते हैं। अकेले लोक निर्माण विभाग ब्लैक स्पॉट चिह्नित नहीं करता। -राकेश गुप्ता, ईएनसी, लोक निर्माण विभाग   

ब्लैक स्पॉट को चिह्नित करना लोक निर्माण विभाग का काम है। पुलिस तो सिर्फ छानबीन करती है। -संजय कुमार, डीजीपी
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सड़क हादसों को रोकने के लिए नहीं बनी ठोस पॉलिसी

हिमाचल प्रदेश की तमाम सरकारें सड़क हादसों से कोई सीख नहीं ले पाई हैं।
हिमाचल प्रदेश की तमाम सरकारें सड़क हादसों से कोई सीख नहीं ले पाई हैं। न हादसों को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर कोई ठोस नीति बन पाई और न ही पुरानी योजनाओं को सिरे चढ़ाया जा सका है। किसी बड़े हादसे के बाद ही सरकार जागती है। हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोग जानें गंवा रहे हैं।

हाल ही में दो दिन के भीतर तीन बड़े हादसों में तीन दर्जन से ज्यादा लोग जान गंवा बैठे। सड़कों की हालत जस की तस है। कई जगह खाइयां हैं लेकिन सड़क न पैरापिट नहीं लगे हैं।

कई बार ड्राइवर शराब पीकर गाड़ियां चलाते हैं तो कई बार मोबाइल फोन सुनकर भी स्टीयरिंग घुमाते हैं। वर्कशॉप से भी आधी-अधूरी मरम्मत कर खटारा बसें सड़कों पर उतार दी जाती हैं। ऐसी बसों के साथ दक्ष ड्राइवर भी धोखा खा रहे हैं।
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