हिमाचल के दोनों राजनीतिक दलों के लिए साख का सवाल बने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (केसीसी) बैंक के निदेशक मंडल के चुनाव में बाजी भाजपा के हाथ लगी। पांच जिलों के 16 में से करीब 10 जोन पर भाजपा के उम्मीदवारों ने कब्जा किया। हालांकि, चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं हुए, लेकिन उम्मीदवार अपरोक्ष रूप से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने खड़े किए थे। हालांकि चुनाव में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा से कम दिलचस्पी दिखाई।
चुुनाव में बड़ा उलटफेर यह हुआ कि बैंक के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपहिया अपने जोन से चुनाव हार गए। उनके जोन में विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार के समर्थित उम्मीदवार रणजीत राणा जीते। यानी, चुनाव परिणाम से यह भी साफ हो गया कि अब बीओडी की बैठक में भाजपा समर्थित नेता ही चेयरमैन चुुना जाएगा। निदेशक मंडल के चुनाव में कुल 53 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। 16 जोन पांच जिलों कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, कुल्लू, लाहौल-स्पीति में हैं। सबसे ज्यादा 9 उम्मीदवार जिला कांगड़ा के बैजनाथ जोन से थे।
राजीव भारद्वाज ऐसे बन सकते हैं अध्यक्ष
केसीसी बैंक को उसका बीओडी यानी निदेश मंडल चलाता है। निदेशक मंडल में कुल 21 सदस्य होते हैं। इनमें से 16 सदस्य चुनाव लड़कर आते हैं। बीओडी में सरकार अपनी ओर से 3 सदस्य मनोनीत करती है। इसके अलावा दो और सदस्य सरकार के होते हैं। इनमें एक सदस्य बैंक का एमडी और दूसरा रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी का भी एक सदस्य होता है। बैंक के वर्तमान चेयरमैन राजीव भारद्वाज को सरकार ने सदस्य के रूप में मनोनीत किया है। पांच सदस्यों वाली बीओडी ने उनको चेयरमैन चुना था। अब 21 सदस्यों वाली बीओडी उनको चेयरमैन चुुन सकती है।
11 हजार करोड़ की पूंजी वाला है बैंक
केसीसी बैंक की 216 शाखाएं पांच जिलों कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और लाहौल -स्पीति में हैं। बैंक के पास 16 लाख ग्राहक हैं। 1800 कर्मचारी हैं। 11 हजार करोड़ जमा पूंजी है, लेकिन इसका नियंत्रण राजनीतिक हाथों में है। यानी, बैंक का एमडी बैंकर न होकर सरकार का अफसर है और चेयरमैन सत्तासीन सरकार का नेता।