हिमाचल की राजनीति में प्रवीण शर्मा दबंग और बेबाक नेता के रूप में जाने जाते थे। प्रशासन पर मजबूत पकड़ और भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल प्रवीण शर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं। अपने आखिरी समय तक वह राजनीति में सक्रिय रहे। प्रवीण शर्मा का जन्म 12 जून, 1954 को उपमंडल अंब के तहत पोलियां पुरोहितां गांव में पंडित ज्योति प्रकाश शर्मा के घर हुआ था। उनके पिता लोक निर्माण विभाग में अधीक्षक थे। तीन भाइयों में एक प्रदीप शर्मा का निधन हो चुका है। दूसरे भाई संजय शर्मा एचपीसीए के प्रदेश प्रवक्ता हैं। उन्होंने दसवीं तक शिक्षा पोलियां पुरोहितां स्कूल से पूरी की। आपातकाल में उन्होंने एक साल जेल में गुजारा।
उन्होंने सेना में सेकेंड लेफ्टिनेंट के लिए क्वालिफाई किया था। पालमपुर रेलवे स्टेशन से पुलिस मीसा के तहत पकड़कर ले गई थी, तब वह सेना में शामिल होने के लिए जा रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने पूर्व सीएम शांता कुमार जैसे नेताओं के साथ जेल में समय बिताया। यदि प्रवीण शर्मा को उस वक्त जेल न भेजा जाता तो शायद उनका कॅरिअर राजनीति के बजाय सेना में होता। उनके साथ ही सेना में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट तैनात हुए पवन चौधरी हाल ही में बतौर ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त हुए हैं। जेल से निकलने के बाद शांता कुमार के साथ ही प्रदेश भर में पदयात्रा में भाग लिया। इसके पश्चात उन्होंने धर्मशाला में अर्थशास्त्र में एमए की।
छात्र राजनीति से की शुरुआत, धूमल सरकार में बने मंत्री
छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले प्रवीण शर्मा अभाविप के राष्ट्रीय सचिव और प्रदेशाध्यक्ष रहे। 1980 के दशक में वह भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री बने। 1995-96 में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। 1998 में चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के रूप में पहली बार चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी हरिदत्त शर्मा को पराजित कर विधायक बने। धूमल सरकार में आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
प्रवीण की अगुवाई में भाजपा को मिली थी बड़ी जीत
2003 में वह राकेश कालिया से चुनाव हार गए। 2007 में उन्हें टिकट न दिए जाने के बावजूद पार्टी ने प्रदेश में चुनाव की बागडोर सौंपी। इसमें भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की। इससे पार्टी में प्रवीण शर्मा का कद और बढ़ा। उन्हें धूमल सरकार में जल प्रबंधन बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया।
मोदी बोले थे-आप वही बड़ी मूछों वाले प्रवीण शर्मा हैं न
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिमाचल प्रदेश भाजपा प्रभारी रहने के समय प्रवीण शर्मा ने उनके साथ बतौर प्रदेश संगठन मंत्री काम किया। भाजपा के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री के साथ नमो एप पर भाजपा कार्यकर्त्ताओं के सीधे संवाद के दौरान प्रवीण शर्मा की उनसे बात हुई। उनका नाम सुनते ही नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप वही प्रवीण शर्मा हैं न बड़ी मूछों वाले। मुझे आपके साथ काम करने का सौभाग्य मिला है।
1998 सरकार बनाने में रही थी अहम भूमिका
1998 में चुनाव में कांटे की टक्कर के बाद प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने की चुनौती में प्रवीण शर्मा की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। भाजपा ने हिविकां के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस दौरान ज्वाला जी विस क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय विधायक रमेश ध्वाला को भाजपा के पाले में लाने तथा सरकार बनाने की भूमिका के चलते ही बाद में उन्हें धूमल का संकट मोचक कहा जाने लगा।
भाजपा सरकार में हमेशा मिला सम्मानजनक स्थान
भाजपा में उनकी भूमिका एक बड़े रणनीतिकार के रूप में रही। जब भी भाजपा सत्ता में आई, उसमें प्रवीण शर्मा को सम्मानजनक स्थान दिया गया। उनके मंत्री काल तथा बाद में भी उनके प्रयास विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। स्वां चैनलाइजेशन, चिंतपूर्णी के सुदूर क्षेत्रों में तक सड़क पहुंचाने में उनकी भूमिका को याद किया जाता है।