प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद संभावित बगावत को टालने के लिए सरकार और मुख्यमंत्री हारे हुए नेताओं को चेयरमैनी देकर जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे भी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बचने वाली है।
भाजपा ने कहा कि वीरभद्र सरकार चंद दिन की मेहमान है। इसलिए अफसर अपनी सीमा के अंदर रहकर काम करें। सत्ती ने कहा कि प्रदेश का जनमत कांग्रेस के खिलाफ है।
ऐसे में वीरभद्र सिंह के पास नैतिक अधिकार नहीं है कि वह इस तरह से रेवड़ियां बांटकर प्रदेश की माली हालत को और अधिक खराब करें। मुख्यमंत्री पहले ही मंत्रियों, सीपीएस और चेयरमैनों की लंबी फौज खड़ी कर चुके हैं।
उसके बावजूद ये सब लोग कांग्रेस को चुनावों में बढ़त नहीं दिला पाए। ऐसे में नए चेयरमैनों की नियुक्तियां कांग्रेस के डूबते जहाज को नहीं बचा सकतीं।
उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि वीरभद्र सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र से ही कांग्रेस को बढ़त नहीं दिला सके। उनके बेटे ने मंडी में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि जो मंत्री और चेयरमैन कांग्रेस को बढ़त नहीं दिला पाएंगे, वे अपने पदों से भारमुक्त किए जाएंगे।
ऐसे में वीरभद्र सिंह को स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हैरानी है कि विजय सिंह मनकोटिया कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी एक छोटे से पद के लिए तैयार हो गए।
झूठे केस बनाने का इनाम मिला मित्रा को
सत्ती ने कहा कि पी. मित्रा को भाजपा नेताओं पर झूठे केस बनाने का इनाम दिया जा रहा है। उन्हें इस कारण अतिरिक्त मुख्य सचिव से मुख्य सचिव बनाया जा रहा है। मित्रा ने एक दिन के भीतर धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी दिलाई। उनके पास ये पद भी ज्यादा दिन नहीं रहेगा।