उधर, शिमला संसदीय सीट पर एचएन कश्यप के खुले तौर पर नाराजगी जताने के बाद पेच फंसता दिख रहा है। भले ही कश्यप का पार्टी पर ज्यादा दबाव न हो, पर उनके जरिये अब पार्टी के अंदर अब तक दबा असंतोष वर्तमान सांसद वीरेंद्र कश्यप के टिकट पर संकट पैदा करना शुरू कर चुका है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अकेले दम पर शर्मा को जिताने का दावा नहीं कर सकते।
वहीं, कश्यप का सर्वे में भले ही प्रत्याशियों में अच्छा रिकार्ड हो लेकिन मत प्रतिशतता के लिहाज से वह कमजोर साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि दोनों ही सीटों पर इस बार पार्टी चेहरा बदलने पर विचार कर रही है।
कांगड़ा सीट पर विचार कर सकता है केंद्रीय नेतृत्व
लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही सांसद शांता कुमार ने चुनाव लड़ने को लेकर आनाकानी शुरू कर दी थी। उनकी इसी आनाकानी के चलते संसदीय क्षेत्र से टिकट पाने के लिए कई नाम सामने आने लगे।
पार्टी के सामान्य सर्वे में वैसे तो शांता किसी भी अन्य नाम से कोसों आगे हैं। लेकिन जातीय समीकरण के लिहाज से मांगे गए नामों में से भी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व विचार कर सकता है।