पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, प्रदेश महामंत्री संगठन पवन राणा, सांसद किशन कपूर, सुरेश कश्यप, रामस्वरूप शर्मा, सभी मंत्रिगण, सभी विधायकगण, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा, प्रवीण शर्मा, गणेश दत्त, राजीव भारद्वाज, रूपा शर्मा, सुखराम चौधरी, विजय अग्निहोत्री, प्रदेश महामंत्री कृपाल परमार, चंद्र्रमोहन ठाकुर आदि भाजपा नेताओें ने अरुण जेटली के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
सत्ती ने कहा कि अरुण जेटली ने एक प्रखर वक्ता, एक आदर्श कार्यकर्ता, लोकप्रिय जनप्रतिनिधि, एक कर्मठ मंत्री और जाने माने कानूनविद के रूप में भारतीय राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि उनके आकस्मिक निधन से पूरी पार्टी सदमे में है। भाजपा नेताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को अपनी संवेदना व्यक्त की है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए ईश्वर से शोक संतप्त परिवार को इस पुण्य क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।
इसके अलावा मंत्रिमंडल के सदस्यों महेंद्र सिंह, सुरेश भारद्वाज, सरवीन चौधरी, डॉ. राम लाल मारकंडा, विपिन सिंह परमार, वीरेंद्र कंवर, बिक्रम सिंह, गोविंद सिंह ठाकुर और डॉ. राजीव सैजल ने भी निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
हिमाचल सरकार में मुख्य सचेतक और पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा ने कहा है कि वह छात्र राजनीति के वक्त से ही अरुण जेटली से प्रभावित रहे हैं। वर्ष 1971 में कोलकाता में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक सम्मेलन था, उसमें हिमाचल से भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ वह भी हिस्सा लेने गए थे।
अरुण जेटली के पास उस समय विद्यार्थी परिषद की बड़ी जिम्मेवारी थी, वह व्यक्तिगत रूप से हिमाचल से आने वाले कार्यकर्ताओं को रिसीव करते रहे। उनकी कोलकाता यात्रा के दौरान की सुविधाओं की खुद निगरानी करते रहे।
बरागटा ने कहा कि वह एसडीवी कॉलेज शिमला में बनीं एससीए में उस वक्त महामंत्री के पद पर नियुक्त थे तो इस हैसियत से इस सम्मेलन में गए थे। बाद तक जेटली के साथ उनका अच्छा परिचय रहा। उनके देहांत का उन्हें बहुत दुख हुआ है।