संगठन के सूत्रों की मानें तो वह आला पदाधिकारियों से खासे नाराज थे। इसके पीछे आईटी को नजरंदाज करना वजह माना जा रहा है। दरअसल, राणा लंबे समय से आईटी प्रकोष्ठ को मजबूत करने की वकालत कर रहे थे।
साथ ही वरिष्ठ नेताओं से भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए जोर दे रहे थे, लेकिन पुरानी पीढ़ी के कई दिग्गज नेता राणा के इस रवैये से नाराज थे। सूत्रों का कहना है कि सरकार बनने के बाद आईटी सलाहकार पद को लेकर भी उनकी नेताओं से ठग गई। इसके बाद से वह पार्टी के कामकाज से दूर हो गए थे।