भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का धर्मशाला दौरा जहां हिमाचल भाजपा नेताओं में नई सियासी जान फूंक गया, वहीं खेमेबाजी पर कड़ा संदेश भी दे गया। अमित शाह ने सियासी इशारों-इशारों में अगले विधानसभा चुनाव में व्यक्ति विशेष को पार्टी का चेहरा नहीं बनाने के संकेत भी दे दिए।
अगर अमित शाह के सियासी इशारों को सही मान कर चलें तो आगामी विस चुनाव के दौरान हिमाचल में भाजपा का सीएम उम्मीदवार पहले घोषित नहीं होगा। अगर ऐसा होता है तो यह हिमाचल की सियासत में नए सियासी समीकरणों को जन्म देगा।
कई बड़े नेता शाह के आगे पीछे चलते रहे
अमित शाह के धर्मशाला पहुंचते ही सियासी हवा भी गर्म हो गई। कई बड़े नेता अपनी-अपनी निष्ठा जाहिर करने के लिए शाह के आगे पीछे चलते रहे। अमित शाह ने नेताओं को साफ संदेश दिया कि खेमेबाजी से दूर होकर किसी भी सूरत में अगला विधानसभा चुनाव जीतो। गगल एयरपोर्ट पर पहले हिमाचल की सियासत में तीसरे ध्रुव के रूप में उभर रहे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पहुंचे।
इसके बाद विमान से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल पहुंचे। शांता कुमार, प्रेम कुमार धूमल और नड्डा ने एयरपोर्ट पर शाह का स्वागत किया। इसके बाद धूमल और शांता शाह के साथ गाड़ी में धर्मशाला को रवाना हुए। नड्डा दूसरी गाड़ी में धर्मशाला आए।
बंद कमरे में शाह ने शांता, धूमल, नड्डा से की चर्चा
होटल इनक्लोवर में बंद कमरे में जलपान के दौरान करीब 25 मिनट तक अमित शाह ने शांता, धूमल, नड्डा से चर्चा की। मंत्रणा के बाद शाह कमरे से बाहर निकले। उनके साथ आगे नड्डा थे। धूमल और शांता पीछे चल रहे थे। कार्यसमिति में शाह के संबोधन के दौरान प्रथम दीर्घा में जेपी नड्डा अमित शाह के साथ बैठे थे। शांता और धूमल दीर्घा के किनारों पर बैठे थे। वहीं, अनुराग ठाकुर पिछली दीर्घा में बैठे थे। संबोधन समाप्त होने के बाद शांता और धूमल ने बंद कमरे में काफी देर तक मंत्रणा की।
सियासी जानकारों की मानें तो पूरे घटनाक्रम में नड्डा नए सियासी ध्रुव की तरह दौरे में चमक रहे थे। सियासी जानकार यह भी मान रहे हैं कि अमित शाह हिमाचल में नए समीकरण बनाने के लिए सबकी नब्ज टटोल गए। वहीं, अमित शाह ने शाम को एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम का दौरा कर दो सियासी खेमों में संतुलन बिठाने की कोशिश भी की।