प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने के बाद दिग्गज कांग्रेस नेताओं को अब पार्टी में अपनी प्रतिष्ठा छिनने का डर सता रहा है। राहुल गांधी ने हिमाचल में कांग्रेस की हार का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस और इसकी कार्यशैली में बदलाव के भी संकेत दिए हैं।
इससे कई कांग्रेस नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। प्रदेश में भाजपा ने मुख्यमंत्री और मंत्री तय कर लिए हैं, लेकिन अब कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का नाम तय करना है। इस पर एक-दो दिन में फैसला हो सकता है। अधिकांश विधायक वीरभद्र सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाने के पक्ष में हैं, मगर कुछ अंदरखाते कुछ और चाह रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि विधायक दल की बैठक में कुछ नेता इस पर मुखर हो सकते हैं। बैठक के लिए हाईकमान ने ऑब्जर्वर तय कर दिए हैं। बैठक कभी भी हो सकती है। कांग्रेस संगठन में भी बड़े स्तर पर बदलाव हो सकता है। यह नेता प्रतिपक्ष तय करने के बाद ही संभावित है।
कांग्रेस की सियासत की भीतर तक खबर रखने वाले कहते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस जब भी सत्ता मेें रही है तो पार्टी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले में क्षेत्रीय संतुलन को साधने का प्रयास हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष के लिए आशा कुमारी का नाम भी चल रहा था, मगर ताजा थप्पड़ विवाद के बाद वे जिस तरह से वीरभद्र सिंह के पक्ष में आ खड़ी हुई हैं, उससे स्थिति कुछ और बनी हुई है।
सुक्खू का भी नाम चलाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि, वीरभद्र के अलावा किसी और के नेता प्रतिपक्ष बनने की संभावना कम है।
अगर ऐसा हो ही जाता है तो कांग्रेस संगठन में भी बड़ा बदलाव संभव है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष पर जल्द निर्णय हो जाएगा।