एचआरटीसी ने हर महीने की तनख्वाह से कर्मचारियों का जीपीएफ तो काट लिया लेकिन उस पैसे को जीपीएफ ट्रस्ट में जमा ही नहीं करवाया।
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अपने करीब पांच हजार कर्मचारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) में करोड़ों का घपला किया है। एचआरटीसी ने हर महीने की तनख्वाह से कर्मचारियों का जीपीएफ तो काट लिया लेकिन उस पैसे को जीपीएफ ट्रस्ट में जमा ही नहीं करवाया।
इस पैसे को एचआरटीसी ने दफ्तर के खर्चे, स्टेशनरी और पेंशन में खर्च कर दिया। इसका खुलासा एचआरटीसी कर्मचारियों की ट्रस्ट की बैठक में हुआ है। बैठक में निगम अधिकारी से बैलेंस शीट मंगवाई गई जिसमें पता चला कि कर्मचारियों का पैसा जमा ही नहीं करवाया गया है।
निगम प्रबंधन के इस कारनामे से कर्मचारियों के पांव तले जमीन खिसक गई है। अब एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने निगम प्रबंधन को 15 दिन के भीतर पैसा ट्रस्ट में जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारी निगम प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा।
पांच हजार परिवहन कर्मियों का कटता है जीपीएफ
निगम प्रबंधन अपने करीब पांच हजार कर्मचारियों का जीपीएफ काटकर ट्रस्ट में जमा कराता है।
निगम प्रबंधन अपने करीब पांच हजार कर्मचारियों का जीपीएफ काटकर ट्रस्ट में जमा कराता है। ट्रस्ट में कर्मचारियों का जीपीएफ ढाई सौ करोड़ होना चाहिए लेकिन इसमें 100 करोड़ रुपये बचे हैं। डेढ़ सौ करोड़ को ट्रस्ट में जमा ही नहीं कराया गया है।
वेतन का 10 से 50 फीसदी तक कटता है जीपीएफ
कितना पैसा जीपीएफ में डाला जाना है, यह कर्मचारी पर निर्भर होता है। सैलरी का न्यूनतम 10 फीसदी जबकि अधिकतम 50 फीसदी राशि जीपीएफ में जमा की जाती है। इस राशि में 9 फीसदी ब्याज मिलता है।
कर्मचारियों के अल्टीमेटम पर प्रशासन ने दी ये सफाई
निगम प्रबंधन प्रदेश सरकार से पैसे की मांग कर रहा है। जल्द ही पैसा ट्रस्ट में जमा कराया जाएगा।
कर्मचारियों के जीपीएफ का पैसा खर्च हुआ है। कर्मचारियों ने इस बारे में शिकायत भी की है। निगम प्रबंधन प्रदेश सरकार से पैसे की मांग कर रहा है। जल्द ही पैसा ट्रस्ट में जमा कराया जाएगा।- मस्त राम भारद्वाज, अतिरिक्त निदेशक एचआरटीसी
कर्मचारियों के जीपीएफ का पैसा जमा कराने के लिए निगम प्रबंधन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। तय समय पर अगर पैसा ट्रस्ट में जमा नहीं कराया तो कानून का सहारा लिया जाएगा।- राजेंद्र ठाकुर, उपाध्यक्ष तकनीकी कर्मचारी संगठन