सेल, गिफ्ट, एक्सचेंज, मोर्टगेज या लीज पर उद्योगों को जमीन देने के लिए हिमाचल मंत्रिमंडल ने नियम सरल कर दिए हैं। प्रदेश के धर्मशाला में प्रस्तावित मेगा इन्वेस्टर मीट से पहले राज्य मंत्रिमंडल ने टेनेंसी एंड लैंड रिफार्म रूल्ज 1975 के तहत नियम 38 ए में ढील देकर हिमाचल में नए उद्योग लगाने को पूंजीपतियों को काफी राहत दे दी है।
अब नए उद्योग लगाने के लिए उद्योगपतियों को विभागों से पहले अनिवार्यता प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं रहेगी। यह अनिवार्यता प्रमाणपत्र सिंगल विंडो से मिलेगा और उद्योग के नाम जमीन के बाद यह औपचारिकता पूरी की जा सकेगी। अभी तक नए उद्योग लगाने के लिए जमीन किराये पर लेने को पूंजीपतियों को दो बार एक ही प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफार्म रूल्ज 1975 के नियम 38 ए के तहत विभिन्न विभागों से मिलने वाले जरूरी प्रमाणपत्रों के लिए निवेशकों को अब ज्यादा चक्कर नहीं काटने होंगे। राज्य मंत्रिमंडल ने शनिवार को इन्हें सरल करने का फैसला ले लिया। अभी तक पूंजीपतियों को ये प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग, ऊर्जा विभाग. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित करीब सात विभागों से प्रमाणपत्र लेने पड़ते थे।
इन प्रमाणपत्रों के लिए विभागों के चक्कर काटने में समय और धन खर्च होता था। मंत्रिमंडल ने रूल्ज में ढील दी है। पूंजीपतियों को अब यह मंजूरी राज्यस्तरीय सिंगल विंडो क्लीयरेंस और मानीटरिंग अथारिटी देगी। इसका मूल मकसद यही है कि राज्य मे उद्योग लगाने के लिए पूंजीपतियों को ज्यादा परेशानी न उठानी पड़े, जिससे राज्य में आसानी से उद्योग स्थापित हो सके।