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बजट के पीछे बड़ा सवाल, इसका जबाव नहीं है किसी के पास

Sat, 10 Mar 2018 01:24 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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जयराम सरकार ने 41,440 करोड़ रुपये का वित्तीय वर्ष 2018-19 का भारी-भरकम बजट तो पेश कर दिया, मगर इसके साथ ही एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया। इतने सारे पैसों का जुगाड़ कहां से होगा? यह बड़ा सवाल है। आंकड़ों के जाल में उलझती सरकार के पास इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। नियमानुसार लगभग 1.35 करोड़ की जीडीपी का तीन प्रतिशत तक ही प्रति वर्ष कर्ज ही लिया जा सकता है। सरकार पहले ही बहुत ज्यादा ऋण ले चुकी है।

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ऐसे में सूबे की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए केंद्र की बैसाखी के सहारे की जरूरत पड़ेगी। बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व की नई सरकार का वित्तीय प्रबंधन भी ठीक वैसा ही घुमावदार नजर आ रहा है जैसा कि पिछली वीरभद्र, धूमल या अन्य सरकारों का रहा है। विशेष बात यह है कि नए मुख्यमंत्री के भी वित्तीय सलाहकार वही अधिकारी हैं जो पिछली दो कांग्रेस और भाजपा सरकारों के रहे हैं।

इन अधिकारियों की काबिलियत से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था चल रही है, ऐसा माना जाता है। इस बार इन वित्त योजना में माहिर माने जाने वाले अफसरों की आर्थिक सोच नई राजनीतिक इच्छा से रंग लाएगी कि नहीं, इस पर संशय बना हुआ है। जब आमदनी अठन्नी से कम और खर्चा रुपये से ज्यादा है, तो ये सब कैसे होगा? बजट पेश करने के बाद यही सवाल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से किया गया, तो उनके भी लगभग वही जवाब थे जो पुराने मुख्यमंत्रियों और उनके सचिवों के होते थे।
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कभी सीएम तो कभी आला अधिकारी इस ज्वलंत प्रश्न पर स्थिति साफ करने का प्रयास जरूर कर रहे थे, मगर बात फिर वहीं आ रही थी कि हाइड्रो पावर, उद्योग और पर्यटन जैसे क्षेत्र ही कुछ कर पाएंगे। इनसे संबंधित कई बजट प्रावधान किए गए हैं। कृषि पर भी खूब फोकस करने की बातें हुईं। हिमाचल की विकास दर के राष्ट्रीय औसत से नीचे चले जाने के बाद इसे ऊपर कैसे उठाएंगे? इस पर भी सरकार लगभग खामोश है।

विकास पर 100 में से साढे़ 39 रुपये खर्च होंगे

बजट अनुमान अगर कुल 100 रुपये माना जाए तो इसमें से वेतन पर 27.18, पेंशन पर 14.22, ब्याज अदायगी पर 10.28, ऋण अदायगी पर 8.76 रुपये चले जाएंगे। शेष 39.56 रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च होंगे। 26.64 के अंतर को ऋण से पूरा किया जाएगा।

अगर प्रदेश की कुल राजस्व आय का 100 रुपये माना जाए तो 27.13 कर राजस्व, 6.52 गैर कर राजस्व, 21.01 केंद्रीय कर में हिस्सेदारी और 45.34 रुपये केंद्रीय अनुदान से प्राप्त होंगे। कुल 100 रुपये में से ऋण को छोड़कर केंद्र से प्राप्त धनराशि समेत प्रदेश की कुल प्राप्तियां 73.36 रुपये होंगी।  

अकेले कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होंगे 11,263 करोड़
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए पेश कुल 41,440 करोड़ रुपये के बजट अनुमानों में से कर्मचारियों के वेतन पर 11,263 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेंशन पर 5,893 करोड़ रुपये व्यय होंगे।

सरकार ने जो कर्जा ले रखा है, उसकी ब्याज अदायगी पर ही 4,260 रुपये खर्च होंगे। पहले से लिए ऋणों की वापसी पर 3,184 करोड़, अन्य ऋणों को लेने पर 448 करोड़ रुपये और रखरखाव पर 2,741 रुपये व्यय होंगे। 

राजस्व घाटा 3,168 करोड़ रुपये का होगा
बजट अनुमानों के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां 30,400 करोड़ रुपये की होंगी। कुल राजस्व व्यय 33,568 करोड़ रुपये और राजस्व घाटा 3,168 करोड़ रुपये का होगा।

सरकार के पूंजी खाते में 6,540 करोड़ रुपये और भविष्य निधि आदि में 1,225 करोड़ रुपये की प्राप्तियों का अनुमान है। ऋण की अदायगी समेत कुल पूंजी व्यय 7,872 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

मौजूदा ढांचे से क्या 2022 तक दोगुना हो पाएगी किसानों की आय

मौजूदा ढांचे से क्या हिमाचल की जयराम सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना कर पाएगी? कृषि और बागवानी हिमाचल की अर्थव्यवस्था के कभी मूलाधार थे, मगर आज ये सबसे कमजोर कड़ी बन चुके हैं। एप्पल स्टेट के नाम से मशहूर रहे हिमाचल प्रदेश की विकास दर अगर राष्ट्रीय औसत से भी नीचे चली गई है तो इसकी सबसे बड़ी वजह प्राथमिक क्षेत्र की बदहाली है। प्राथमिक क्षेत्र के मूल घटक कृषि और पशुपालन हैं। मगर प्रदेश में कृषि और पशुपालन दोनों की स्थिति ही ठीक नहीं है। खेती पर सबसे बड़ी चुनौती जंगली-जानवर बने हुए हैं।

इसके लिए जयराम सरकार ने सोलर फेंसिंग की सामुदायिक योजना में उपदान जरूर बढ़ाया है, मगर इसे धरातल पर लागू करना बड़ी बात है। प्रदेश में अब तक हुई सोलर फेंसिंग में कभी बैटरी नहीं चलने की समस्याएं आ रही हैं तो कभी इसमें नहीं लग पाने वाली पतली तारों के हर तरह के जानवरों को रोक पाने में कामयाब नहीं माना जाता है। जयराम सरकार ने सिंचाई के लिए तीन नई योजनाओं को शुरू करने का एलान किया है। इनमें सोलर पंपिंग नया प्रयोग होगा।

ये प्रयोग शिमला में जुब्बड़हट्टी के पास कलहोग गांव में सफलता से किया गया है। इसी मॉडल को पूरे प्रदेश में अपनाने की कृषि मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं। पांच साल में सोलर पंपिंग से पानी उठाने की योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान अच्छा है, मगर अभी ये पंपिंग भी प्रायोगिक दौर में है। ये पंपिंग अभी महज 200-250 मीटर ऊंचाई तक ही हो पा रही है। प्रदेश के बहुत से बागवानी क्षेत्र जलस्रोतों से 500 से 1000 मीटर ऊंचे हैं।

प्रदेश को 4000 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी देने वाली सेब की फसल ऐसे ही क्षेत्रों में ज्यादा होती है। ये क्षेत्र बर्फ न गिरने से लो चिलिंग होने और सिंचाई की व्यवस्था न होने से खतरे में हैं। पिछले साल भी 40 फीसदी सेब पैदावार कम होना ही प्राथमिक क्षेत्र की विकास दर में गिरावट का बड़ा कारण रह है।

बजट पेश करने के बाद जब अमर उजाला ने मुख्यमंत्री ये सवाल किया कि मौजूदा ढांचे में 2022 तक किसानों की आमदनी कैसे दोगुना होगी, जबकि 85 फीसदी क्षेत्र गैर सिंचित हैं और किसानों की कई नई चुनौतियां भी हैं तो इस पर उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है। कृषि और सिंचाई के लिए तभी काफी बजट प्रावधान किए गए हैं।

घटती विकास दर के बीच जयराम सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र का खास ध्यान रखा है। खेतीबाड़ी की कई योजनाओं के लिए हिमाचल सरकार ने 1160 करोड़ का प्रावधान किया है। इसमें 685 करोड़ के बजट की कृषि और 475 करोड़ रुपये के बजट की बागवानी के लिए घोषणा की गई है।

कई नई योजनाएं शुरू करने के अलावा पुरानी स्कीमों में नए बजट प्रावधान करने का भी एलान किया गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास किया जाएगा।  हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौहान ने बजट में कृषि क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करने का स्वागत किया। साथ ही कहा कि इन योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाए।
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लोक लुभावन बजट, सीमित संसाधनों पर शंका

अर्थशास्त्री एनके शारदा - फोटो : अमर उजाला
अर्थशास्त्री एनके शारदा ने कहा कि हिमाचल की जयराम सरकार का पहला बजट जनहित और सरकार के सीमित आय संसाधनों में तालमेल का प्रयास है। भले ही बजट लोक लुभावन है, लेकिन सीमित संसाधनों सीमित संसाधनों के चलते विकास को गति प्रदान करने में ये बजट प्रावधान कितने कारगर साबित होंगे, यह समय ही तय करेगा।

सरकार इस बजट में सुशासन के प्रति गंभीर नजर दिख रही है। ई-गवर्नेंस आने वाले पांच सालों में अहम भूमिका निभाएगी। बजट में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल विकास योजनाओं को सक्षम और उपयोगी बनाने को 100 करोड़ बजट प्रावधान किया है।

बेघरों के लिए आवास, दिहाड़ी दरों में बढ़ोतरी कर इसे 220 करने, वरिष्ठ नागरिकों की वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा को घटाकर 70 साल करने सामाजिक क्षेत्र में आम लोगों को राहत देने वाले कदम हैं। हिमाचल में गृहिणी सुविधा योजना महिलाओं को जरूर राहत देगी। प्रदेश में आज भी चूंकि कृषि और बागवानी और लघु एवं छोटे उद्योग लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत हैं।

सीएम ने इस पहले बजट में लड़खड़ा रहे कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए सिंचाई, योजनाओं के साथ वित्तीय सहायता सरल करने और आवंटन की ओर कदम बढ़ाया है। पुष्प क्रांति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। विक्रें द्रीकरण विकास की दिशा में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय को बढ़ाया है। 

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सीएम ने निरोग योजना, स्वास्थ्य सहभागिता योजना, सशक्त महिला योजना की बात की है। सामाजिक सुरक्षा और विकलांगता पेंशन में बढ़ोतरी की भी बात की है। शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित मुख्यमंत्री आदर्श विद्या केंद्रों के लिए 25 करोड़ का बजट प्रावधान शिक्षा की गुणवत्ता में नई पहल है।

हिमाचल में पर्यटन क्षेत्र में रोजगार की अच्छी संभवानाएं है। गैर उत्पादक प्रशासनिक व्यय पर अंकुश लगाकर सरकार न केवल वित्तीय घाटा कम कर सकती है, बल्कि विकास पर व्यय किए जाने वाले संसाधनों को भी बढ़ा सकती है।

बजट में प्रदेश में औद्योगिकीकरण को गति देने के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और अन्य करों में छूट, पन विद्युत उत्पादन पर बल, सड़कों में सुधार और शेष अधोसंरचना के विकास को कई कदम उठाना प्रस्तावित हैं। कुल मिलाकर बजट से यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार सबका साथ सबका विकास के प्रति कटिबद्ध है।
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