सूत्रों ने बताया कि इसके बावजूद अधिकतर उपायुक्तों ने इसकी रिपोर्ट सरकार को अभी तक नहीं दी है। इससे जिला प्रशासन की ढिलाई भी सामने आ गई है। हिमाचल प्रदेश में 3,52,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है।
प्रदेश में वैसे भी खाद्यान्न फसलों को उगाने का लोगों मेें रुझान कम हो चुका है। जहां 1997-98 में खाद्यान्न फसलों कोे उगाने के लिए 853.88 हजार हेेक्टेयर क्षेत्र था, वहीं ये अब घटकर करीब 832 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रह गया है।
सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य महकमे में प्रमुख अभियंता का कार्यभार देख रहे इंजीनियर आरएम मुकुल का कहना है कि अभी तक प्रदेश के जलस्रोतों में पानी की बहुत अधिक कमी होने की रिपोर्ट कहीं से नहीं है।
दूसरी ओर राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजी परियोजना के अधिशासी अभियंता इंजीनियर विजय कश्यप ने कहा कि राज्य में ग्राउंड वाटर की स्थिति पर आंकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं। अभी ये बता पाना मुमकिन नहीं है कि इसमें कितनी कमी आई है।
बिलासपुर जिले में में पूरे जिले में गेहूं की बिजाई हुई है। जिला की 31, 878 हेक्टेयर भूमि पर फसलें उगाई जाती हैं। 26,138 हेक्टेयर भूमि पर फसलें केवल बारिश के भरोेसे हैं। गत माह हुई बारिश से किसानों को राहत जरूर मिली थी, लेकिन अभी गेहूं की फसल को बारिश की जरूरत है।
मंडी में जिला भर में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर सूखे का 10 से 15 प्रतिशत प्रभाव पड़ा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 100 प्रतिशत बिजाई हो चुकी है। कुछ दिन पहले हुई बारिश से फसलों में नमी के कारण अभी तक इन पर अधिक सूखे का प्रभाव नहीं पड़ा है।
लेकिन 10 से 15 दिनों में अगर बारिश नहीं हुई तो फसलों पर भारी प्रभाव पड़ेगा। जिले में कुल 71 हजार 750 हेक्टेयर भूमि पर बिजाई की गई है। उपनिदेशक रूपलाल चौहान ने इसकी पुष्टि की।
शिमला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे किसानों और बागवानों की अपेक्षाओं के अनुरूप अभी तक पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। इससे रामपुर उपमंडल के किसानों-बागवानों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
उद्यान विभाग ने प्रशासन को सूखे की मार से बागवानी को 20 लाख रुपये के नुकसान की आकलन रिपोर्ट भेजी है। एसडीएम रामपुर डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि सूखे की मार से अभी तक किसी पंचायत में पेयजल की समस्या तो सामने नहीं आई है।
बागवानी विभाग ने कृषि और बागवानी को सूखे की मार से 20 लाख रुपये की नुकसान का आकलन किया है। इसकी रिपोर्ट डीसी के माध्यम से सरकार को भेज दी गई है।
पिछले दिनों ऊना जिला में जमकर हुई बारिश ने ऊना में सूखे से निजात दिलाई है। हालांकि जिला का 40 फीसदी क्षेत्र सिंचित है, जबकि 60 प्रतिशत क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। कृषि उपनिदेशक यशपाल चौधरी का कहना है कि जिले में सूखे की कोई स्थिति नहीं है। आने वाले दिनों में और बारिश होती है तो यह फसलों के लिए लाभकारी होगी।
बारिश न हुई तो कांगड़ा में खेती को नुकसान
जिला कांगड़ा के सभी इलाकों में बिजाई हो चुकी है। ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां बिजाई नहीं हुई है। इससे जिले की 94 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर बिजाई हुई है। जिला कृषि अधिकारी डा. अरुण व्यास के अनुसार अगर 15 फरवरी तक बारिश नहीं हुई तो खेती को नुकसान होगा।
चंबा जिले में बारिश न होने से किसानों की चिंताएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कृषि विभाग के उपनिदेशक डीसी डोगरा ने बताया कि जिले में बारिश न होने से चालीस प्रतिशत फसलें सूखे की चपेट में हैं।
बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार फरवरी माह तक 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। जिले में किसानों की ओर से गेहूं, मटर आदि की फसलों की बिजाई कर दी गई है। अब यदि आगामी समय में बारिश नहीं होती है तो 50 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान हो सकता है।
सोलन जिले में सूखे की वजह से बागवानी और कृषि दोनों विभागों को नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों को गेेहूं बीजने में देरी हो रही है। सब्जी उत्पादन और अन्य नकदी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। राज्य कृषि विभाग ने सूखे की वजह से 15 प्रतिशत नुकसान की आशंका जताई है।\
सोलन में बारिश आधारित खेती वाली जगहों में गेहूं की बिजाई दिसंबर के आखिर और जनवरी तक चलती रही है। जिसमें तय समय से करीब एक से डेढ़ माह की देरी हुई है। उधर, बागवानी विभाग को सूखे के चलते करीब 21 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
इसकी रिपोर्ट विभाग ने सरकार को भेज दी है। एडीएम विवेक चंदेल ने बताया कि दोनों विभागों से समय-समय पर सूखे से नुकसान की रिपोर्ट मांगी जाती है। प्रशासन सूखे से निपटने के लिए समय-समय पर निर्देश भी जारी करता है।
कृषि विभाग में हमीरपुर जिले के उपनिदेशक डा. विनोद कुमार का कहना है कि जिले में 33 हजार हेक्टेयर भूम पर वर्तमान में खेतीबाड़ी होती है। हर साल औसतन 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं की पैदावार होती है। लेकिन बारिश न होने के कारण अभी तक 40 फीसदी नुकसान हो चुका है।
बारिश न होने से आने वाले समय में यह नुकसान बढ़ सकता है। गेहूं की पैदावार के साथ पशुपालकों को चारे की समस्या भी हो सकती है। जिले में अब तक कृषि को 40 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
सिरमौर जिले में सूखे की वजह से लगभग 40 करोड़ रुपये की फसलें तबाह हुई है। अकेले गेहूं की फसल को ही करीब 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सूखे की वजह से लगभग पांच हजार हैक्टेयर क्षेत्र में किसान बिजाई नहीं कर पाए।
जबकि जौ, गेहूं और दलहनी फसलों की भी यही स्थिति है। जौ में दो हजार, गेहूं में तीन हजार हैक्टेयर में किसान बिजाई नहीं कर पाए। जिला प्रशासन ने पूरे सिरमौर जिले में सूखे की वजह से 80 फीसदी फसलें नष्ट होने की रिपोर्ट सरकार को भेजी है।