इसके चलते 5.36 करोड़ की हानि हुई। बोर्ड ने एक मामले में बिल राशि के भुगतान की समय पर निगरानी नहीं की। अस्थाई कटौती आदेश जारी करने में 25 महीने लिए थे। तब तक उपभोक्ता से वसूली योग्य विद्युत प्रभारों की राशि 1.62 करोड़ तक बढ़ गई।
विद्युत के संस्वीकृत भार की तुलना में अधिक आहरण को पकड़ने का तंत्र न होने के चलते बोर्ड को 36.78 लाख की राजस्व हानि हुई। बोर्ड ने कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों में जमा संशोधित वेतन तथा भत्तों के लाभ वापिस लेते हुए ब्याज के रूप में भुगतान किए गए 37.05 लाख रुपये के वित्तीय लाभ का आहरण
नहीं किया। बिक्री सर्कुलर की गलत प्रयोज्यता तथा एक ही परिसर में दो भिन्न कनेेक्शन जारी करने के द्वारा बोर्ड ने एक उपभोक्ता पर लोअर वोल्टेज आपूर्ति सरचार्ज के आधार पर 25.58 लाख तथा एचटी श्रेणी दो पर लागू योग्य
उच्च दर सूची के आधार पर 16.22 लाख का बिल नहीं लगाया था। इसके अलावा बोर्ड ने राज्य विद्युत विनियामक आयोग द्वारा अनुमोदित विद्युत आपूर्ति कोड 2009 के संबंध में 5.06 करोड़ के निश्चित मांग प्रभार भी माफ किए।
नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने जंगी थोपन तथा थोपन पोवारी जल विद्युत शक्ति परियोजनाओं का क्रियान्वयन न होने का मामला भी उठाया है। कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं के विकासकर्ता के साथ पूर्व क्रियान्वयन अनुबंध की शर्तों के अनुसार
जब्ती के स्थान पर 260.13 करोड़ के अपफ्रंट प्रीमियम को रिफंड करने के राज्य सरकार के निर्णय के परिणामस्वरूप राजस्व की हानि होगी। विकासकर्ता को भी अनुचित लाभ होगा।
काशंग जल विद्युत परियोजना की दोनों स्टेजों का निर्माण कार्य अप्रैल 2009 के दौरान शुरू हुआ। यह काम 48 महीनों के भीतर पूरा होना था, लेकिन परियोजना की पहली इकाई सितंबर 2016 में स्थापित हुई।
एशियन विकास बैंक ऋण भारत सरकार के माध्यम से 90 प्रतिशत अनुदान (498.99 करोड़) के रूप में प्राप्त हुआ। 10 प्रतिशत ऋण (55.44 करोड़) हिमाचल सरकार द्वारा 100 प्रतिशत ऋण में परिवर्तित किया गया। इससे परियोजना लागत पर 152.83 करोड़ के ब्याज सहित 651.82 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
लोक निर्माण विभाग केंद्रीय कृत आवंटन के तहत 487.14 करोड़ के भुगतान के लिए मंडलों ने 141.57 करोड़ रुपये समायोजित नहीं किए। इसमें से 35.13 करोड़ 8 से 11 साल से अधिक की अवधि के लिए बकाया थे। जिन मंडलों में नमूनों की जांच की गई।
उनमें आवंटन और आपूर्ति के आदेशों के प्रति 2.51 करोड़ के मूल्य के 663.221 मीट्रिक टन तारकोल की कम प्राप्त हुई। मंडलीय स्तर पर खरीद के तहत नमूना जांचित मंडलों ने समक्ष अधिकारी की मंजूरी के बिना ही 31.48 करोड़ रुपये के 7 हजार 292. 733 मीट्रिक टन तारकोल की खरीद की।
3859.874 मीट्रिक टन तारकोल की वास्तविकता का विवरण नमूना जांचित मंडलों के पास उपलब्ध नहीं था। इससे दुरुपयोग या चोरी होने की जोखिम की बढ़ोतरी हुई। तारकोल का मॉनीटरिंग सिस्टम भी मौजूद नहीं था।
लोनिवि में ऑप्टिकल फाइबर केबल को बिछाने के लिए भी हमीरपुर मंडल की ओर से टेलीफोन कंपनियों से देय राशि की गलत दरों को लागू करने के परिणाम में 1.59 करोड़ रुपये की कम वसूली की गई।