सामरिक महत्व की बिलासपुर-लेह रेललाइन अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट सर्किट को भी जोड़ेगी। इस ट्रैक के बनने से सैलानी लेह-लद्दाख, हिमाचल के लाहौल, बिहार के बोध गया, उत्तर प्रदेश के सारनाथ वाराणसी, त्रिपुरा के सबरूम तक रेलमार्ग से जा सकेंगे। बोध गया में भूटान, चीन, जापान, म्यांमार, नेपाल, सिक्किम, श्रीलंका, ताईवान, थाइलैंड, तिब्बत और वियतनाम की मोनेस्ट्री हैं। इंफाल और वर्मा के बीच जब ट्रैक बन जाएगा तो यह पूरे साउथ एशियाई देशों को जोड़ देगी।
जियोलॉजिकल सर्वे के बाद उक्त रेललाइन निर्माण के लिए उत्तर रेलवे ने आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना प्रमुख ने प्रदेश फारेस्ट के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक संजय सूद के साथ दिल्ली में बैठक की है। इस बैठक में उनके साथ यूक्सेल कंपनी के इंजीनियर, पर्यावरण स्टडी विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। रेललाइन के तहत आने वाली वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरियों और वन विभाग की क्लीयरेंस रिपोर्ट लेने के लिए उत्तर रेलवे ने काम शुरू कर दिया है।
परियोजना प्रमुख ई. हरपाल सिंह ने दिल्ली में हिमाचल के एपीसीसीएफ संजय सूद से वार्ता की है। वहीं इस रेललाइन के तहत आने वाली वन भूमि पर तैयार होने वाली रिपोर्ट के बारे में चर्चा की है। तय किया है कि प्रदेश वन विभाग और उत्तर रेलवे मिलकर सारे प्वाइंटस का गहन अध्ययन करने के बाद ही रिपोर्ट तैयार करेंगे। दिल्ली में इस चर्चा के दौरान अलाइनमेंट इंजीनियर खुशबू अरोड़ा भी मौजूद रहीं।
कमेटियां करेगी रेललाइन का निरीक्षण
वन भूमि का प्रस्ताव तैयार होने के बाद केंद्र की पर्यावरण मंत्रालय और जलवायु परिवर्तन कमेटियां इस रेललाइन का निरीक्षण करेंगी। केंद्र की दो कमेटियों के निरीक्षण के बाद ही इसे मंजूरी दी जाएगी। इन कमेटियों में एक नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की कमेटी होगी, जिसके अध्यक्ष खुद पीएम हैं।
कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
रेललाइन का निर्माण करते समय किसी भी तरह से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बैठक में चर्चा की गई है ताकि इस रेललाइन के साथ लगते झरने-नदियां और झीलों को प्रदूषण से बचाया जा सके। सुरंगों का निर्माण करते हुए मिट्टी किन स्थानों पर डंप की जाएगी, उस पर भी चर्चा हुई है ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो।
- हरपाल सिंह, परियोजना प्रमुख