कैबिनेट ने दस वर्ष में 13,066 मिलियन यूनिट बिजली बेचकर एरियर वसूलने का लक्ष्य निर्धारित किया था। कैबिनेट के फैसले से हिमाचल सरकार ने पंजाब को अवगत भी करवा दिया था। पहले तो पंजाब उक्त फैसला मानने को तैयार था, लेकिन अब पंजाब ने हाथ वापस खींच लिए हैं। इससे हिमाचल सरकार की परेशानियां बढ़ गई हैं।
हिमाचल सरकार ने अपना हिस्सा लेने के लिए सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ी। सुप्रीमकोर्ट से फैसला हिमाचल के पक्ष में आया। उस समय पंजाब पर बकाया 4200 करोड़ रुपये बनता था, लेकिन दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी कि हिमाचल को पंजाब 2900 करोड़ ही देगा।
ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने बताया कि पंजाब सरकार को हिमाचल कैबिनेट के फैसले से अवगत कराया गया है। पहले पंजाब सरकार बकाया चुकाने को तैयार थी, लेकिन अब कोई जवाब नहीं दे रही है। ऐसे में हिमाचल सरकार दोबारा मामला पंजाब सरकार के साथ उठाएगी। केंद्र सरकार को भी इस संदर्भ में अवगत कराया जाएगा।