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Shimla News: सेब के पौधों पर बीटल अटैक, रातोंरात फल और पत्तों को कर रहे तबाह

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मनोहर लाल ठियोग खनेउडी
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जिले में 20 से 30 फीसदी फसल प्रभावित, पौधे का मुरझाना और विकास रुक जाने का खतरा बढ़ा
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के चलते जिले के सेब बगीचों में भृंग (बीटल) संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। यह कीट मुख्य रूप से रात के समय हमला करता है और पत्तियों के साथ-साथ फलों को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे सेब खराब हो जाते हैं और पौधों की वृद्धि भी प्रभावित होती है।
ठियोग, रोहड़ू, कोटगढ़ और मशोबरा सहित ऊपरी शिमला के अधिकतर क्षेत्रों में इस कीट का प्रकोप 20 से 30 फीसदी फसल को प्रभावित कर चुका है। बागवानों के अनुसार पहले यह कीट केवल पत्तियों पर हमला करता था, लेकिन इस वर्ष यह फलों को भी खा रहा है, जिससे सेब आधे खाए हुए और पूरी तरह से खराब हो रहे हैं।
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बीटल आमतौर पर रात को सक्रिय होते हैं। ये पहले पत्तियों को कंकाल की तरह चाट जाते हैं और अब फलों को भी खाकर फसल को बर्बाद कर रहे हैं। यह कीट ‘मई भृंग’ या ‘जून भृंग’ के नाम से भी जाना जाता है। ये बहुभक्षी होते हैं और बागवानी तथा कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में गंभीर कीट माने जाते हैं।
गर्मियों की बारिश के दौरान और उसके बाद ये कीट वयस्क अवस्था में मिट्टी में अंडे देते हैं। अंडों से निकलने की अवधि आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर एक महीने तक होती है, जो प्रजातियों पर निर्भर करता है।
बागवान सुरेंद्र मेहता, अजीत, सूरत शर्मा (नेरवा-चौपाल), रत्तन चौहान (जुब्बल) और सुभाष चौहान (रोहड़ू) के अनुसार इस कीट से बचाव के लिए जैविक कीटनाशकों का प्रयोग प्रभावी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि अग्निअस्त्र, डेरेकास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क का शाम के समय दो से तीन दिन लगातार छिड़काव करने से पत्तियों और फलों को बचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बगीचों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, खरपतवार और अनावश्यक झाड़ियों को समय-समय पर हटाना भी भृंग नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
बागवानों ने संबंधित विभागों से इस समस्या को गंभीरता से लेकर वैज्ञानिक सलाह और तकनीकी सहयोग की मांग की है ताकि फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।

क्या कहते हैं बागवान

सभी सेब के बगीचों में बीटल कीट का अटैक बढ़ गया है। इससे फसल की पैदावार के साथ-साथ फल भी खराब हो रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में यह आक्रमण बढ़ गया तो ऐसे में तो इस साल स्प्रे का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
-पवन मेहता, बागवान, कोटगढ़


बीटल का आक्रमण इतना बढ़ गया है कि यह फल को खाकर एक ही रात में पूरी तरह खत्म कर देता है। इसके बाद साथ वाला फल भी सड़ जाता है। बारिश के बाद इसका आक्रमण बढ़ना शुरू हो गया है। जो एक बड़ी परेशानी बन गया है।
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-मनोहर लाल, बागवान, ठियोग गांव खनेउड़ी

बगीचों में लाइट ट्रैप लगाएं
प्रति हेक्टेयर दो से तीन लाइट ट्रैप बगीचे के बाहर लगाएं, ताकि व्यस्क भृंग आकर्षित होकर फंस सकें। वहीं शाम के समय पेड़ों को हल्के-हल्के हिलाएं, जिससे भृंग नीचे गिर जाते हैं। इन्हें एक कपड़े या तिरपाल पर इकट्ठा कर, मिट्टीतेल आधारित या अनुशंसित संपर्क कीटनाशी घोल भरी बाल्टी में डालकर नष्ट करें।
-डॉ. उषा शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र
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