मंदिर में फूलों के रंग-बिखरे नजर आए और वातावरण में भक्ति, संगीत तथा आनंद की अद्भुत छटा देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान सभी भक्तों ने फूलों की होली खेली और भगवान के पावन नाम का संकीर्तन किया।
उत्सव की शुरुआत गौर निताई के महाभिषेक से हुई। महाभिषेक पंचगव्य और विभिन्न प्रकार के फलों के रस से विधि-विधान के साथ किया गया। भक्तों ने गौर निताई, राधा-गोपीनाथ, जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा देवी के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना। अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे महामंत्र के गूंजते स्वर से भक्तिमय हो उठा। वृंदावन से आई कीर्तन मंडली ने मधुर भजन गाए। इस्कॉन शिमला के अध्यक्ष आनंद दास ने चैतन्य महाप्रभु के जीवन चरित्र पर विस्तृत कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु ने प्रेम, करुणा और नाम संकीर्तन का संदेश देकर संपूर्ण विश्व को भक्ति का सरल मार्ग दिखाया। संवाद