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दिग्गजों की लड़ाई में ‘मोहरों’ की हाथापाई

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं गगरेट के विधायक राकेश कालिया और चतुर्थ वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं चिंतपूर्णी के विधायक कुलदीप कुमार के बीच अंदरखाते छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। हैरानी की बात है कि दिग्गज खामोश हैं और ‘मोहरे’ आगे हैं।
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इस जंग के शुरू होते ही पर्दे के पीछे बैठे कुछ लोगों ने सियासी झगड़े की आग में घी डालने की पहले से तैयारियां कर ली थीं। परिणामस्वरूप दोनों दिग्गजों के  झगड़े को लेकर सड़कों पर भी कोहराम मच गया। कुलदीप कुमार के घर के बाहर हुई जोरदार नारेबाजी के जरिये गगरेट के यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य कांग्रेसियों ने गुबार निकाला।

कुलदीप कुमार के पक्ष में उतरी चिंतपूर्णी कांग्रेस ने भी शब्द बाण चलाकर विवाद को हवा दे दी। इस पूरे प्रकरण में राकेश कालिया और कुलदीप कुमार चुप्पी साधे रहे और कार्यकर्ताओं ने हल्ला मचाते हुए अपना गुस्सा जताया। बताया जा रहा है कि इस सियासी कोहराम से हुई किरकिरी पर अब जिला कांग्रेस कमेटी ने चिंतपूर्णी और गगरेट के ब्लाक कांग्रेस पदाधिकारियों को शांत रहने की हिदायत दे दी है।
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दोनों नेताओं के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन

कुलदीप कुमार के घर के बाहर नारेबाजी करने अधिक संख्या में जुटे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। दूसरी ओर राकेश कालिया और कुलदीप कुमार दोनों के मौजूदा हलकों से भी एक-दूसरे का पुराना नाता है।

राकेश कालिया चिंतपूर्णी से 2003 और 2007 में दो बार विधायक रहे हैं और कुलदीप कुमार गगरेट से 1993, 1998 और 2003 में तीन बार विधायक बने।

2012 के विधानसभा चुनाव में चिंतपूर्णी हलका आरक्षित होने के कारण कुलदीप ने चिंतपूर्णी से चुनाव लड़ा और राकेश कालिया को गगरेट से मैदान में उतरना पड़ा। चुनाव के ऐन मौके पर ही कालिया ने गगरेट के भंजाल में नया घर भी तैयार करवा दिया था।
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