हिमाचल प्रदेश सरकार ने ऊर्जा निदेशक हरीकेश मीणा की अध्यक्षता वाली कमेटी को बिजली परियोजनाओं से रॉयल्टी लेने की लड़ाई लड़ने का जिम्मा सौंपा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से मामला उठाने को प्रदेश सरकार ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। सरकार ने रॉयल्टी में अधिक बिजली निशुल्क देने को लेकर एसजेवीएन को नोटिस जारी किया है। राज्य का उचित हिस्सा लेने को केंद्रीय प्राधिकरण की मध्यस्थता से अब मामला हल करने की कवायद शुरू हुई है। ऊर्जा निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी में राज्य बिजली बोर्ड और पावर कारपोरेशन से अधिकारियों को बतौर सदस्य शामिल किया है। यह कमेटी पूरे मामले की रिपोर्ट बनाकर जल्द ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के समक्ष प्रदेश के हितों का मामला उठाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बीते दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से इस मामले को लेकर मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने आरके सिंह के साथ राज्य में एसजेवीएन और एनएचपीसी की बिजली परियोजनाओं में विलंबित रॉयल्टी के कारण होने वाली राजस्व हानि के कारण प्रदेश के हितों की रक्षा के बारे में विचार-विमर्श किया था। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत नीति के तहत मुफ्त बिजली देने का आग्रह किया था और 40 वर्ष के बाद यह परियोजनाएं राज्य को वापिस मिलने का मामला उठाया था।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त करते हुए कि कहा था कि विद्युत परियोजनाओं में राज्य को कम से कम 12 प्रतिशत न्यूनतम रॉयल्टी मिलनी चाहिए। उन्होंने रॉयल्टी के मामले और राज्य सरकार की चिंता के अन्य सभी विषयों की समीक्षा एक स्वतंत्र प्राधिकरण के रूप में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ दोनों पक्षों के अधिकारियों की टीम द्वारा करने का सुझाव दिया था। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने मामले को सुलझाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। 20 जनवरी तक इस मामले की समीक्षा पूर्ण करने पर सहमति बनी है। ऐसे में संभावित है कि जल्द ही प्रदेश की कमेटी दिल्ली जाकर मामला उठाएगी।