स्वर्गीय धैमला राम और कायां देवी के चार बेटों में सबसे छोटे रुमेल सिंह का जन्म 22 फरवरी, 1966 को भरमौर के राजौर गांव में हुआ। हाई स्कूल भरमौर से पढ़ाई के बाद 1985 में पॉलिटेक्नीक हमीरपुर से इलेक्ट्रिकल में तीन वर्षीय डिप्लोमा किया। आर्थिक तंगी के चलते बीए प्राइवेट की। 1997 में यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की से एमटेक की। इससे पहले 1987-88 में रेलवे बोर्ड में एक साल बतौर कनिष्ठ अभियंता सेवाएं दीं।
1988 में प्रदेश बिजली बोर्ड में कनिष्ठ अभियंता के पद पर सेवाएं शुरू कीं। वर्तमान में शाहपुर डिविजन में अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। बिजली बोर्ड के 30 साल के सेवाकाल में पांगी, भरमौर, डलहौजी, चंबा, बकलोह, चुवाड़ी, सोलन और शिमला में सेवाएं दे चुके हैं।
संगीत का ज्ञान नहीं, शौक ने बढ़ाया आगे
रुमेल सिंह का कहना है कि उन्हें संगीत का ज्ञान नहीं है। इसका उन्होंने कोई प्रशिक्षण भी नहीं लिया, लेकिन बचपन से गाने का शौक था, जिसने इस क्षेत्र में आगे बढ़ाया। नौकरी करने के बाद अपने इस शौक को पूरा किया। रुमेल ने सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी वंदना को दिया है। इनके बेटे सेना में लेफ्टिनेंट हैं, जबकि बेटी फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही हैं।