ससुर अनुज सूद और सास सारिका सूद ने बहू की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उनका बेटा सलिल सूद भी दिव्यांग है और आजकल वह चंडीगढ़ में नौकरी कर रहा है। कुछ वर्ष पूर्व ही दोनों की शादी हुई थी। दोनों ही सुनने और बोलने में अक्षम हैं।
लेकिन, अपने सपनों को साकार करने में अक्षमता को भी दोनों ने मात देकर अन्य बच्चों के लिए भी वे प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करते रहे हैं।
अनामिका ने कभी भी अपने सपनों के आगे दिव्यांगता को बाधा नहीं बनने दिया। बल्कि उसने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अपने ससुराल और मायके का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
अनामिका बचपन से काफी तेज थी। उसने जिंदगी की चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार किया और अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए अधिकांश विषय में टॉप किया है। पोस्ट ग्रेजुएट अनामिका इस समय पेंटिंग कर अपना समय व्यतीत कर रही है।
उसकी पेंटिंग की कई प्रदर्शनियां जिला संग्रहालय धर्मशाला में लगी हुई हैं। अनामिका की माता अनीता और पिता अनिल ने कहा कि अनामिका कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहती और अपना सारा कार्य वह स्वयं ही पूरा करती है। वह परिवार का सहारा बनकर एक बेटे की भूमिका निभाना चाहती है।