जिले के उभरते चित्रकार अमन कुमार ने कहा कि हिमाचली संस्कृति को चित्रों के जरिये दुनिया में पहचान दिलाना उनका मकसद है। मलयेशिया से हाल में लौटे युवा चित्रकार ने बताया कि 2018 उनके लिए बेहतर रहा है। इस दौरान उन्हें अपनी पेंटिंग्स के लिए बेहतर मंच मिला है।
उनके चित्रों में हिमाचली संस्कृति की झलक मिलती है। संस्कृति को इस साल उन्हें तीन बार अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रदर्शित करने का मौका मिला है। उनके बनाए चित्रों की प्रदर्शनी मलयेशिया, यूक्रेन और स्लोवेनिया जैसे देशों में लग चुकी है।
वे फोटोग्राफी कर स्वयं के लिए चित्रों की पेंटिंग्स बनाते हैं। उन्हें कलम से जीवंत रूप देते हैं। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव, गेयटी थियेटर शिमला में भी उनकी चित्रकला को सराहना मिली है। वे आईआईटी मंडी के स्टाफ के बच्चों को 2017 से लगातार चित्रकला का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
उन्होंने यह कला पिता राजेश कुमार से सीखी है। उनके पिता एक सफल चित्रकार रहे ळैं। से सीखी है। गौर हो कि मन मंडी के थनेहड़ा मोहल्ला निवासी हैं। उन्होंने चित्रकला में भविष्य को लेकर कहा कि युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए। एक बार प्रयास से कभी सफलता नहीं मिलती है।
इसलिए बार-बार प्रयास करना चाहिए। इंटैक संस्था के कन्वीनर नरेश मल्हात्रा ने कहा कि उनकी संस्था भी आर्ट और हैरिटेज को जीवंत रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस मौके पर अमन के पिता राजेश कुमा, अनिल शर्मा, पृथ्वी सेन और कर्नल केके मौजूद रहे।