जेईई एडवांस में 147वां रैंक हासिल करने वाले अभिनव की कामयाबी की राह बेहद जटिल रही। दसवीं में महज 60 प्रतिशत अंक लेने के बावजूद अभिनव ने हार नहीं मानी। निरंतर पढ़ाई की और आज आईआईटी में बुलंदियों पर पहुंचे। अभिनव के दादा प्रकाश नेगी की मानें तो इसमें हिमाचल के नंबर वन समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ का भी योगदान रहा है।
प्रकाश नेगी ने बताया कि वे पोते की पढ़ाई को लेकर चिंतित थे। महज 60 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले बेटे को किस संस्थान में पढ़ाया जाए कि वह और बेहतर अंक हासिल कर सके। ‘अमर उजाला’ में छपी विभिन्न शिक्षण संस्थानों की खबरों की कतरने (कटिंग) वे हमेशा से रख रहे थे।
अंतत: उन्होंने अपने पोते का दाखिला कॅरिअर अकादमी नाहन में करवाने का मन बनाया। यहां दाखिला लेने के बाद अभिनव ने जमा एक में 82 और जमा दो में 78 प्रतिशत अंक हासिल किए। साथ ही यहां कोचिंग लेने के बाद आईआईटी में भी 147वां रैंक हासिल किया।
अभिनव के अनुसार वे लगातार पांच से सात घंटे तक पढ़ाई करते थे। इसमें स्कूल शिक्षकों का भी अहम योगदान रहा। अभिनव के पिता सुरेंद्र सिंह नेगी पेश से किसान हैं।
किन्नौर के काफण गांव से ताल्लुक रखने वाले अभिनव के दादा प्रकाश नेगी कामयाबी के बाद स्वयं स्कूल पहुंचे। स्कूल प्रबंधन ने जहां उन्हें बधाई दी, वहीं प्रकाश नेगी ने भी शिक्षकों का आभार जताया। अभिनव का कहना है कि आईआईटी करने के बाद वे आईएएस की परीक्षा भी देंगे।