शादी समारोह में बुकिंग के बावजूद बैंड सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर बैंड संचालक को 9 फीसदी ब्याज के साथ 14 हजार रुपये लौटाने होंगे। मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा 15 हजार रुपये और 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने होंगे। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। आयोग के समक्ष नागरोटा बगवां उपमंडल के कीर चंबा पंचायत निवासी चमन लाल ने शिकायत दायर की थी। शिकायत के अनुसार उन्होंने 4 जनवरी 2026 को अपने बेटे अभिषेक कुमार के 5 फरवरी 2026 को होने वाले विवाह समारोह के लिए पालमपुर क्षेत्र के जय मां चामुंडा ब्रास बैंड के संचालक पवन कुमार से 5 सदस्यीय बैंड की बुकिंग करवाई थी। इसके लिए 9,000 रुपये तय हुए और उन्होंने अग्रिम राशि के रूप में 4,000 रुपये और 200 रुपये शगुन के तौर पर अदा किए थे। इसकी बाकायदा रसीद भी जारी की गई थी।
विवाह के दिन तय समय पर बैंड नहीं पहुंचा
शिकायत में कहा गया कि विवाह के दिन तय समय पर बैंड नहीं पहुंचा। कई बार फोन करने पर पहले संचालक ने जल्द पहुंचने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में फोन उठाना बंद कर दिया और मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। बरात रुकने और सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ने की स्थिति में शिकायतकर्ता को तत्काल दूसरे बैंड का इंतजाम करना पड़ा, जिसके लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद विपक्षी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते उसे एकतरफा घोषित कर दिया गया। आयोग ने शिकायतकर्ता और गवाहों के शपथपत्रों और दस्तावेजों के आधार पर माना कि बैंड संचालक ने तय सेवा उपलब्ध नहीं कराई। इससे शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी हुई। इसे सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। सभी तथ्यों को जांचने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।