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अब सनवारा टोल प्लाजा में पहले की तरह टोल वसूली

Thu, 03 Jun 2021 09:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, सोलन

सार

रोक के चलते परवाणू-शिमला फोरलेन दो दिन टोल इकट्ठा नहीं हुआ। गुरुवार  को रोक हट गई है। 
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सनवारा टोल प्लाजा । - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सनवारा स्थित टोल प्लाजा में टोल फीस वसूलने को चुनौती देने वाली याचिका में केंद्र और राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह जनहित से जुड़े इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें। इस मामले पर सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है। प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जून को पारित अपने पहले आदेश में दो जून तक टोल टैक्स वसूली पर रोक लगा दी थी।

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चूंकि अब हाईकोर्ट ने टोल फीस रोक के बारे में कोई अग्रिम आदेश पारित नहीं किए हैं तथा अब पहले की भांति दोबारा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से टोल फीस वसूल की जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि इस बीच अंतरिम राहत दी जाए और टोल प्लाजा सनवारा पर टोल फीस जमा करने से फिलहाल छूट दी जाए। इस पर कोर्ट कहा कि अंतरिम राहत की प्रार्थना पर विचार उत्तरदाताओं की ओर से उत्तर दाखिल के बाद किया जाएगा।

न्यायमूर्ति रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर पारित किया। प्रार्थी टोल प्लाजा को स्थापित करने पर सवाल उठाए हैं। प्रार्थी के अनुसार सनवारा में टोल प्लाजा अवैध और राष्ट्रीय नियमों के विपरीत है राजमार्ग शुल्क दरों और संग्रह का निर्धारण नियम, 2008 के अनुसार कोई भी टोल प्लाजा नहीं हो सकता है। 60 किलोमीटर की दूरी के भीतर एक ही खंड में अन्य टोल प्लाजा चंडी मंदिर जिला पंचकूला में स्थित है और जिला सोलन के परवाणू में 60 किलोमीटर के भीतर सनवारा टोल प्लाजा बनाया गया है।
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 प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 95 प्रतिशत कार्य परवाणू-सोलन रोड पूरा बताते हुए मैसर्स जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स के ठेकेदार को गलत और मनमाने ढंग से कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया है। प्रार्थी का आरोप है कि काम पूरा होने से पहले टोल वसूला जा रहा है। निर्माण कार्य और फ्लाईओवर के निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा और इसके अंडर पास कुमारहट्टी, सप्रून और टिंबर ट्रेल रिजॉर्ट परवाणू में कार्य पूर्ण नहीं हैं। इसमें महीनों लग सकते हैं या एक वर्ष और लग सकता है।

ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि 95 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। प्रार्थी के अनुसार जनता को अधूरी सुविधाओं के लिए बेतहाशा दरों से टोल टैक्स देने को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजमार्ग का ठीक से रखरखाव नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने वाहनों की ओर से देय टोल टैक्स दरों को नियत करने वाली अधिसूचना को रद्द करने की न्यायालय से गुहार लगाई है।

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