लाहौल घाटी में ही करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू बीज का उत्पादन होता है। इस बार लाहौली आलू बीज की करीब 2 लाख बोरियां देश की मंडियों में पहुंच चुकी हैं।
बेहतर गुणवत्ता के कारण लाहौल के आलू बीज की पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत पंजाब, पश्चिमी बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों से मांग रहती है।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के निदेशक डा. एसके चक्रवर्ती कहते हैं कि केंद्र सरकार ने हिमाचल समेत चार राज्यों के आलू बीज पर रोक लगा दी है। ये राज्य भोज्य (खाने वाला) आलू ही दूसरे राज्यों में बेच पाएंगे। आलू बीज पर सूत्र कृमि का असर किसानों की लापरवाही के कारण आया है।
खेतों में एक साल आलू उगाने के बाद तीन साल तक दूसरी फसलें जैसे फ्रासबीन, जौ, मटर और सोयाबीन उगाएं। खेतों में हर साल आलू की फसल लेने से सूत्र कृमि की समस्या पैदा होती है। इसका समाधान फसल बदलना ही है। इस समस्या से निजात के बाद ही किसान आलू बीज तैयार कर पाएंगे।
हिमाचल के आलू बीज पर प्रतिबंध से हैरान हैं। जांच के लिए एजेंसी ने किस इलाके के आलू बीज के सैंपल भरे हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है।- डॉ. रामलाल मारकंडा, कृषि मंत्री, हिमाचल सरकार