सुहानी चौहान और पार्श्व शर्मा ने तैयार किया कार्डियक अलर्ट सिस्टम।
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हार्ट अटैक आने से पहले ही मरीज के परिजनों को कलाई घड़ी खुद ही कॉल कर देगी। हिमाचल के चंबा जिले के सुदूर क्षेत्र चुवाड़ी के स्कूली विद्यार्थियों ने हार्ट अटैक से लोगों की जान बचाने के लिए यह कलाई घड़ी विकसित की है। घड़ी के इस प्रोटोटाइप को एनआईटी हमीरपुर में चल रहे राज्यस्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन में प्रदर्शित किया गया है।
कार्डियक अलर्ट सिस्टम की खास बात यह है कि पुराने सामान और कुछ नए उपकरणों की मदद से इसे विकसित किया गया है। चुवाड़ी के हिमालयन पब्लिक सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल की छात्रा सुहानी चौहान और पार्श्व शर्मा ने इस प्रोटोटाइप को बनाया है। इस अलर्ट सिस्टम से इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की पल्स रेट 50 प्रति मिनट से नीचे जाने पर पहले से फीड किए गए इमरजेंसी नंबर पर कॉल चली जाएगी।
रक्तचाप के मरीजों में 50 से नीचे अथवा 150 से ऊपर बीपी रहने पर हार्ट अटैक का खतरा रहता है। हालांकि यह उपकरण निम्न रक्तचाप रहने पर अलर्ट देगा इसमें उच्च रक्तचाप को लेकर प्रोग्रैमिंग नहीं की गई है। सुहानी का कहना है कि उनके एक रिश्तेदार की अकेले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। रात को कमरे में अकेले थे और सुबह उन्हें मृत हालत में देखा गया। किसी की हार्ट अटैक के कारण इस तरह से मौत न हो इसके लिए यह अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया है।
ऐसे काम करता है यह उपकरण
कार्डियक अलर्ट सिस्टम को तैयार करने के लिए माईक्रो कंट्रोलर आरडीनो, एलडीआर सेंसर, दो इलेक्ट्रोड आरडीनी यूनो, दो बैटरी, स्विच, एक एनपीएन ट्रांजिस्टर 547 और कॉलिंग मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है। उपकरण में लगी दो इलेक्ट्रोड पल्स रेट का पता लगाएंगे। यह इलेक्ट्रोड माइक्रो कंट्रोलर को पल्स रेट के 50 के नीचे जाने पर अलर्ट देंगे।
अलर्ट मिलते ही माइक्रो कंट्रोलर से कॉलिंग माड्यूल को संकेत मिलेगा। संकेत मिलते ही इस सिस्टम में पहले से फीड नंबर पर कॉल चली जाएगी। सुहानी और पार्श्व ने इस प्रोटोटाइप में पुराने कॉलिंग फोन का इस्तेमाल किया है। इस प्रोटोटाइप की कुल लागत 1300 रुपये आई है। सुहानी का कहना है कि इसे कलाई घड़ी का रूप देने पर करीब दो हजार रुपये लागत आएगी।