हिमाचल हाईकोर्ट ने ट्रायल में देरी के चलते पोक्सो के तहत 22 साल के आरोपी युवक को जमानत पर रिहा कर दिया है। न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की अदालत ने याचिका को स्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने के कारण निकट भविष्य में मुकदमा पूरा होने की संभावना नहीं है, जो जमानत देने के लिए अच्छा आधार है। 31 मार्च 2024 से अभी तक इस मामले में मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। न ही आरोप तय किए गए हैं। इस मामले में करीब 27 गवाह हैं, जिनमें से 15 सरकारी गवाह हैं। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की कोई पिछली आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। आरोपी 6 सितंबर 2023 से हिरासत में है।
इसके खिलाफ अभी आरोप साबित होने बाकी है। न्यायिक हिरासत में याचिकाकर्ता को रखने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि आरोपी सिर्फ 22 साल का युवक है। अदालत ने 50000 हजार रुपये का मुचलका भरने के आदेश दिए। पुलिस ने 31 मई 2023 को याचिकाकर्ता पर आईपीसी की धारा 341, 342, 363, 376 और 120 बी और पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया। यह मामला पुलिस स्टेशन भुंतर जिला कुल्लू का है। याचिकाकर्ता ने दूसरी बार अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर दिया। इससे पहले भी एक बार आवेदन किया गया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।