परंपराएं कितनी अटूट होती हैं। शीर्ष अदालत से महिलाओं को देश भर के सभी मंदिरों में पुरुषों के बराबर देवी-देवताओं के दर्शनों और पूजा-अर्चना की आजादी मिल चुकी है। बावजूद इसके बाबा बालक नाथ मंदिर में अभी तक कोई महिला श्रद्धालु पवित्र गुफा के नजदीक जाने की खुद हिम्मत नहीं जुटा सकी हैं।
वे पहले की तरह दूर चबूतरे से बाबा की पवित्र गुफा के दर्शन कर रही हैं। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर में सारी व्यवस्थाएं अभी तक पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। महिला श्रद्धालु पूर्व की तरह मंदिर के प्रांगण में बने चबूतरे से ही बाबा के दर्शन कर रही हैं।
लेकिन बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास ने महिलाओं को पवित्र गुफा के समीप से दर्शन करवाने के कोई खास इंतजाम भी नहीं किए हैं। प्रदेश के अन्य मंदिरों की तरह बाबा बालक नाथ मंदिर में महिला और पुरुषों के लिए एक रास्ता नहीं है। मंदिर में पहले की भांति महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रास्ते बने हुए हैं।
इन दोनों रास्तों पर बड़े-बड़े अक्षरों में महिला और पुरुष के लिए सांकेतिक बोर्ड भी लगे हैं। पुरुषों के लिए बनाया गया रास्ता तो सीधे पवित्र गुफा तक पहुंच जाता है। लेकिन महिलाओं के लिए जो मंदिर न्यास ने रास्ता बनाया है, वह पवित्र गुफा के बजाय चबूतरे तक ही पहुंचता है। सबके मन में सवाल है कि जब रास्ता गुफा तक पहुंचता ही नहीं तो महिलाएं गुफा के नजदीक से बाबा के दर्शन कैसे कर सकती हैं।
मंदिर में महिलाओं के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है। मंदिर न्यास के सभी कर्मचारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि अगर कोई महिला पवित्र गुफा के नजदीक जाना चाहती है तो उसे रोकने की कोशिश न की जाए। अभी तक किसी भी महिला ने गुफा के समीप से बाबा के दर्शन नहीं किए हैं। हां, मंदिर में महिला और पुरुषों के लिए दो अलग-अलग रास्ते बने हैं।- अक्षय सूद, चेयरमैन बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट एवं एसडीएम बड़सर
अभी तक किसी भी महिला ने गुफा तक जाने की इच्छा नहीं जताई है। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग रास्ते बने हैं। अगर महिला गुफा तक जाना चाहें तो पुरुष के लिए बनाए रास्ते से जा सकती हैं। मंदिर न्यास की ओर से कोई मनाही नहीं है।- ईश्वर दास शर्मा, मंदिर अधिकारी, बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट दियोटसिद्ध