हिमाचल प्रदेश के आयुर्वेदिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक अब अंग्रेजी दवाइयां (ऐलोपैथिक) नहीं लिख सकेंगे। यदि किसी चिकित्सक ने मरीज को एलोपैथिक दवाइयां लिखीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ऐसी कंडीशन जब, मरीज को एलोपैथिक दवाइयां देनी जरूरी हो, तो डॉक्टर लिख सकता है, लेकिन इसकी पूरी वजह उस चिकित्सक को बतानी होगी।
आयुर्वेदिक विभाग आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था करने जा रहा है। औषधीय पौधों के रोपण के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ ही अस्पतालों में प्राचीनतम योग पद्धति से भी रोगियों का इलाज जल्द शुरू किया जाएगा।
सिरमौर दौरे पर आए आयुर्वेदिक विभाग के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी)डॉ. दिनेश कुमार ने अमर उजाला से खास मुलाकात में यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक विभाग के अधिकतर संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में जड़ी-बूटियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।