गर्मियों में तापमान बढ़ते ही हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में अब बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। बर्फ पिघलने से जनजातीय क्षेत्रों में ग्लेशियर भी गिर रहे हैं। रोहतांग के आसपास बर्फबारी के दौरान हुए नुकसान का भी अब पता चलने लगा है।
लाहौल के प्रवेश द्वार रोहतांग दर्रे से 20 किलोमीटर दूर कोकसर स्थित बीआरओ के 94 आरसीसी का ट्रांजिट कैंप हिमखंड की चपेट में आने से ध्वस्त हो गया। ट्रांजिट कैंप के अंदर पड़ा सामान भी इधर-उधर बिखरा है।
कुछ सामान चंद्रा नदी की भेंट चढ़ गया, जबकि ट्रांजिट कैंप की स्टील शीटें भी नदी के वामतट तक पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना पिछले कुछ दिन की है। इसका पता रोहतांग की ओर से अभी आवाजाही होने पर पता चला है।
94 आरसीसी के कमांडिंग ऑफिसर हरीश बाबू ने कोकसर स्थित ट्रांजिट कैंप के हिमखंड से क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बचाव चौकी कोकसर और 94 के चौकीदार ने इस बारे में सूचित किया है। कहा कि कोकसर तक मार्ग बहाल होने पर नुकसान का आकलन किया जाएगा।
फिलहाल सिस्सू स्थित लोनिवि विश्राम गृह कैंप लगाया है। यहां से टीम नॉर्थ पोर्टल के गुफा होटल से आगे बर्फ हटाने की मुहिम छेड़ चुकी है। अगर मौसम का मिजाज ठीक रहा तो एक सप्ताह के भीतर ही कोकसर तक सड़क बहाल कर रोहतांग फतह की मुहिम छेड़ी जाएगी।