विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से घोटाला करने वालों के हौसले बुलंद होते रहे और छात्रवृत्ति घोटाला 250 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। प्रदेश में इस साल सत्ता परिवर्तन के बाद जनजातीय क्षेत्रों में छात्रवृत्ति न मिलने के मामले सामने आने के बाद हुई जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
इसके चलते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मामले की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश करनी पड़ी। छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर तैयार की गई शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि एक निजी शिक्षण
संस्थान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए 800 सीटें थी जबकि एडमिशन 3300 विद्यार्थियों को दे दी गई। शिक्षा निदेशालय ने भी इस मामले की जांच किए बिना 3300 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी।