फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: सैलानियों को लुभा रहा राष्ट्रपति भवन दी रीट्रीट

विज्ञापन
विज्ञापन
एक हफ्ते में दस हजार ने की परिसर की सैर
विज्ञापन

सैलानियों के लिए 50 रुपये रखा है प्रवेश शुल्क
हर्षित शर्मा
शिमला। पर्यटन सीजन के बीच छराबड़ा के पास स्थित राष्ट्रपति भवन द रीट्रीट सैलानियों से गुलजार हो गया है। एक हफ्ते में 10,000 से ज्यादा सैलानी 174 साल पुराने इस ऐतिहासिक भवन को देखने पहुंचे हैं।

पिछले साल अप्रैल में सैलानियों के लिए राष्ट्रपति भवन को खोला है। इसमें भारतीय नागरिकों के लिए 50 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 250 रुपये प्रवेश शुल्क रखा है। शिमला से 10 किलोमीटर दूर 115 एकड़ भूमि में फैला राष्ट्रपति भवन का निर्माण 1850 में किया था। द रिट्रीट के नाम से प्रचलित राष्ट्रपति भवन में शिमला का सबसे बड़ा उद्यान क्षेत्र है जहां पौधों की 100 से ज्यादा प्रजातियां उपलब्ध हैं। इनमें डेजी़, हाईड्रेंजर, अरिबटा गर्मियों में पार्क को लुभावना बना रहे हैं।
विज्ञापन

राष्ट्रपति भवन के आसपास मेपल, ओक और देवदार के पेड़ हैं। साथ ही राष्ट्रपति भवन के उद्यान में 350 से ज्यादा सेब के के पौधे हैं जो सैलानियों को आकर्षित करते हैं। 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित राष्ट्रपति भवन से शाली-टिब्बा, श्रीखंड महादेव, रियो पुरगिल जो हिमाचल की सबसे ऊंची पहाड़ी है डिओ टिब्बा और पार्वती पर्वत की चोटियां दूरबीन देखी जा सकती हैं। कल्याणी हेलीपैड से लोग 2.2 किलोमीटर की एक एडवेंचर ट्रेल से जा सकते हैं जिससे वह नजारों को देखते हुए सीधा राष्ट्रपति भवन तक पहुंचेंगे। राष्ट्रपति भवन के अंदरूनी हिस्से को संग्रहालय में बदला है। ऐतिहासिक धरोहरों के साथ यहां रुके राष्ट्रपति के भी व्यक्तिगत सामान और पेंटिंग संभाल कर रखे हैं। राष्ट्रपति भवन के मैनेजर संजू डोगरा ने बताया कि राष्ट्रपति भवन ऐतिहास और पर्यावरण का ऐसा समागम है जहां सबके लिए कुछ न कुछ है। सैलानी रोज भवन को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। इस हफ्ते 10,000 से ज्यादा सैलानी घूमने पहुंचे थे।
विज्ञापन


साल में चार बार रंग बदलता है कॉपर बीच पेड़
राष्ट्रपति भवन परिसर में सौ साल से ज्यादा पुराने दो कॉपर-बीच पेड़ भी हैं। पूरे देश में इस प्रजाति के 5 ही पेड़ हैं, एक राजधानी के वाईल्डफलावर हॉल में और एक चायल में। यह पेड़ साल में चार बार रंग बदलते हैं। सर्दियों में यह पेड़ लाल, बसंत में बैंगनी, गर्मियों में बरगैंडी और बरसात के मौसम में तांबे का रंग ले लेते हैं। बरसात में अपने तांबे के रंग के कारण ही इसे कॉपर-बीच कहा जाता है। पत्तियों में मौजूद रंग द्रव्य के कारण यह पेड़ दृष्टि के कोण के आधार पर रंग बदलते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें