मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को अटल टनल रोहतांग को लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों के साथ निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सुरंग को शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए ताकि सितंबर अंत तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण किया जा सके। बीआरओ के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर केपी पुरुषोथमन ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि परियोजना को समय पर पूरा किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि अटल टनल से लाहौल स्पीति अब वर्ष भर देश-दुनिया से जुड़ा रहेगा। टनल न होने से यह क्षेत्र साल में छह महीनों के लिए भारी बर्फबारी के कारण कट जाता है। पीर पंजाल पर्वत शृंखला को काटकर निर्मित टनल से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई है। लोगों के अलावा लेह-लद्दाख पहुंचने के लिए सेना को भी इस सुरंग का लाभ मिलेगा।
सीएम ने कहा कि लेह-लद्दाख तक सभी मौसमों में संपर्क के लिए मनाली-लेह मार्ग पर अतिरिक्त सुरंगें बनाए जाने की आवश्यकता है। 16000 फीट ऊंचे बारालाचा दर्रे को पार करने के लिए 13.2 किलोमीटर लंबी सुरंग, 16800 फीट पर लाचुंग दर्रे पर 14.78 किलोमीटर सुरंग, 17480 फीट पर स्थित तंगलंगला दर्रा पर 7.32 किलोमीटर सुरंग बनाए जाने की जरूरत है।
इस मौके पर जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, सांसद रामस्वरूप शर्मा, विधायक सुरेंद्र शौरी, मुख्य सचिव अनिल खाची, सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव देवेश कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वेणुगोपाल, उपायुक्त कुल्लू डॉ. ऋचा वर्मा और बीआरओ के अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे।
अटल टनल रोहतांग की खासियत
सुरंग नौ किलोमीटर लंबी है और 3000 मीटर की ऊंचाई पर यह दुनिया की सबसे लंबी सुरंग होगी। सुरंग में हर 150 मीटर पर दूरभाष सुविधा, 60 मीटर में फायर हाइड्रेंट, 500 मीटर में आपातकालीन गेट, 2.2 किलोमीटर पर कैवर्न मोड़, एक किलोमीटर में वायु गुणवत्ता निगरानी ब्रॉडकास्टिंग प्रणाली और 250 मीटर में सीसीटीटीवी कैमरे के साथ स्वचालित घटना का पता लगाने की प्रणाली स्थापित की गई है।