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इस पर्यटन नगरी में बाहरी लोगों के होटलों पर चिंतित थे अटल बिहारी

Sat, 18 Aug 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू/खराहल
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पर्यटन नगरी मनाली में बाहरी लोगों के होटलों को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चिंतित रहते थे। वे यहां स्थानीय लोगों के कारोबार करने के पक्षधर थे।

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पूर्व प्रधानमंत्री की यादें ताजा करते हुए तत्कालीन विधायक चंद्र सेन ने बताया कि मनाली परिधिगृह में वाजपेयी जी ने उनसे पूछा था कि यहां स्थानीय लोगों के कितने होटल हैं। इस पर बाहरी लोगों के ज्यादा भवन होने की जानकारी दी गई।

इससे वे चिंतित दिख रहे थे। वाजपेयी ने साठ के दशक में मनु ऋषि से बीच रास्ते में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया था। उस समय मंदिर का रास्ता काफी ऊबड़खाबड़ और बड़े-बड़े पत्थरों से भरा था।
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ऐसे में मंदिर तक पहुंचना काफी कठिन था। इसके चलते उन्होंने बीच रास्ते में ही माथा टेककर मनु ऋषि से आशीष लिया था। चंद्रसेन कहते हैं कि अटल जनसंघ के सांसद बने थे तो उन्होंने उनसे परिधि गृह में कहा कि

मनाली में और क्या है देखने के लिए तो उन्होंने मनु ऋषि के बारे में बताया था। अटल बिहारी वाजपेयी को लाल चावल और माश काफी पसंद थे। चंद्र सेन ठाकुर के अनुसार वे माश और लाल चावल को बेहद पसंद करते थे।

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अटल ने मुहैया करवाया था स्कूल और पानी  

चंद्रसेन ठाकुर के मुताबिक उन्हें विधायक बने महज डेढ़ माह हुआ था। प्रीणी के लोगों ने वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल और पानी की मांग रखी तो अटल जी ने तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार और उन्हें निर्देश दिए।

उसके बाद स्कूल और पानी शीघ्र मुहैया करवाया था। प्रीणी के पूर्व प्रधान कुंदन लाल के अनुसार प्रीणी के लोगों को इस बात पर गर्व है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल का घर यहां पर है। पूर्व सांसद महेश्वर सिंह कहते हैं कि अटल कभी भी कुल्लू के परिधि गृह में नहीं रहे।

वे मौहल या मनाली में रहते थे। यहां उन्हें काफी सुुकून मिलता था। वे शांत वादियों में कविताएं लिखते थे। मौहल में ब्यास किनारे भी कई कविताएं लिख चुके हैं। वाजपेयी जब मनाली में थे तो उस समय उन्होंने करीब दस दिन तक यहां से सरकार चलाई थी। 
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