पसंदीदा जगह होने के कारण वाजपेयी का नाता मनाली से पहले से ही था। बेटी की शादी होने के बाद ये रिश्ता और प्रगाढ़ हुआ। उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य हिमाचली हैं। इसकी वजह ये है कि रंजन के माता- पिता डाक्टर होने के कारण कई साल हिमाचल में रहे।
उनके पास बोनाफाइड हिमाचली प्रमाणपत्र था। रंजन जिस होटल श्रृंखला में काम करते थे, उसका बड़ा होटल मनाली में है। इसी होटल के साथ प्रीणी वाला घर रंजन का है। यहीं वाजपेयी छुट्टियां मनाने आते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद वह पहली बार कुल्लू आए। ढालपुर में हुई रैली में वाजपेयी ने हिमाचल को 100 करोड़ की स्पेशल ग्रांट घोषित की थी।
दूसरी रैली शिमला के रिज मैदान पर हुई थी तो यहां भी 100 करोड़ दे गए। खास बात यह भी है कि वाजपेयी जब तक प्रधानमंत्री रहे, हिमाचल में कांग्रेस या भाजपा हर सरकार को उनका स्नेह मिला। 1999 में वाजपेयी पार्वती विद्युत परियोजना का शिलान्यास करने कुल्लू के मणिकर्ण आए।
तब धूमल मुख्यमंत्री थे और प्रधानमंत्री को रिसीव कर चंडीगढ़ से कुल्लू लाए। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि यदि 400 करोड़ का पैकेज मिल जाए तो बड़ी मदद होगी। हालांकि, ये मांग वे मंच से नहीं करेंगे, क्योंकि इससे पहले बिन मांगे ही प्रधानमंत्री 200 करोड़ दे चुके थे।
धूमल कहते हैं- मंच पर किसी वक्ता ने अपने संबोधन में बिना चर्चा किए 200 करोड़ की मांग रख दी और वाजपेयी जी ने इसकी घोषणा भी कर दी। लंच के दौरान जब उन्होंने कार्यक्रम को लेकर पूछा तो मैंने कहा कि 400 करोड़ मिलते तो ज्यादा अच्छा होता।
वाजपेयी जी ने तुरंत कहा - तुम सूप पियो, मैं 400 करोड़ दे रहा हूं। इसके बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने 400 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। वापसी पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर पंजाब और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने भी आर्थिक पैकेज मांगा। वाजपेयी ने जवाब दिया- हिमाचल तो मेरा घर है। कुछ और बात करो।