अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी मित्र रहे स्वर्गीय टशी के छोटे बेटे रामदेव कपूर कहते हैं कि पिता का वाजपेयी के साथ आरएसएस के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण के दौरान गुजरात के बडोदरा में 1942 में मुलाकात हुई।
पूरे प्रशिक्षण के दौरान टशी दवा अकेले बुद्धिस्ट थे। लिहाजा उनके नाम और चेहरे को वाजपेयी प्रधानमंत्री बनने तक नहीं भूले। प्रधानमंत्री बनने पर टशी ने वाजपेयी से दिल्ली जा कर कई बार मुलाकात की और रोहतांग टनल निर्माण को लेकर चर्चा की।
टशी के सारथी रहे लाहौल के वयोवृद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे कहते हैं कि अटल और टशी की दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी दोस्ती थी। कृषि मंत्री डॉ. मारकंडा ने उस दौरान बतौर राज्य मंत्री वाजपेयी के मंच का संचालन किया था। डॉ. मारकंडा का कहना है कि रोहतांग सुरंग को वाजपेयी ने जनजातीय लोगों के सपने धरातल पर उतारा है।