इतना ही नहीं, हड़सर से सिविल अस्पताल तक चोटिल और शवों को लाने के लिए संस्थान को भरमौर प्रशासन की ओर से पहली बार गाड़ी भी प्रदान करवाई गई है। बता दें कि मणिमहेश यात्रा पर हड़सर से डलझील तक 13 किलोमीटर तक लोग पैदल पहुंचते हैं।
इसके अलावा कुगति कैलाश परिक्रमा और होली से वाया जैलखड्ड कलाह होते हुए भी शिवभक्त डल झील पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए सुदंरासी, डलझील, कुगति परिक्रमा, कलाह परिक्रमा, धनछौ और गौरीकुंड में सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों पर अटल बिहारी पर्वतारोहण सस्थान भरमौर की रेस्क्यू टीम के सदस्य तैनात रहेंगे।
अटल बिहारी पर्वतारोहण संस्थान भरमौर की इस टीम में 67 के करीब रेस्क्यू करने के लिए तैनात रहेंगे। रेस्क्यू टीम में 25 सदस्यों को बढ़ाया गया है। जिसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है।
मणिमहेश यात्रा के दौरान वर्ष 2017 में छनछौ में एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी। रेस्क्यू टीम की व्यवस्था न होने की सूरत में डेढ़ दिन तक शव धनछौ में ही पड़ा रहा। जिस पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की ओर से कड़ा ऐतराज जताया गया था।
प्रशासन टीम को मुहैया करवाएगा गाड़ी
अटल बिहारी पर्वतारोहण संस्थान भरमौर के इंचार्ज जितेंद्र कुमार ने बताया कि चोटिल और यात्रा के दौरान जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के शवों को सिविल अस्पताल तक रेस्क्यू टीम की ओर से पहुंचाया जाएगा। इसके लिए बाकायदा प्रशासन की ओर से गाड़ी भी प्रदान की गई है।