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Himachal: साढ़े चार साल की उम्र में मांगी भीख, छत न दो वक्त की रोटी, दृढ़ संकल्प ने बना दिया डॉक्टर

Sat, 05 Oct 2024 12:53 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला

सार

 डॉ. पिंकी ने बचपन में भूख मिटाने के लिए मां के साथ भीख मांगी, साढ़े चार साल की हुई तो एक चैरिटेबल ट्रस्ट के हॉस्टल में पहुंचीं।
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जामयांग के साथ पिंकी हरयान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अगर दृढ संकल्प हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। कुछ ऐसा कर दिखाया है डॉ. पिंकी हरयान ने। बचपन में न तो छत थी, न दो वक्त की रोजी रोटी, न पैसे और न ही और साधन           संपन्न परिवारों के बच्चों के तरह खेलने के लिए खिलौने।  डॉ. पिंकी ने बचपन में भूख मिटाने के लिए मां के साथ भीख मांगी, साढ़े चार साल की हुई तो एक चैरिटेबल ट्रस्ट के हॉस्टल में पहुंचीं। वहां पर पढ़ाई के साथ-साथ चित्रकला की और अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर बतौर डॉक्टर लोगों की सेवा करेंगी। धर्मशाला के चरान खड्ड किनारे झुग्गी-झोपड़ी से अपने बचपन की शुरुआत करने वाली डॉ. पिंकी हरयान जब साढ़े चार साल की थी तो वह अपनी मां के साथ भीख मांग रही थी।

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 इस दौरान टोंग-लेन चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक थारचेन गेलसन लोबसांग जामयांग की नजर उस पर पड़ी। यह संस्था झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले निर्धन बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण के लिए काम करती है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में डॉ. पिंकी ने बताया कि काफी ना-नुकर के बाद माता-पिता ने वर्ष 2004 में उसे संस्था के डिपो बाजार धर्मशाला स्थित हॉस्टल में भेज दिया। हाॅस्टल में रहने के साथ-साथ दयानंद मॉडल पब्लिक स्कूल धर्मशाला से पढ़ाई की।  2014 में दसवीं तो 2016 में बारहवीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की। बारहवीं कक्षा के उत्तीर्ण करने के बाद उसने नीट की परीक्षा पास की लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया। इसके चलते 2018 में चीन की मेडिकल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और बीते माह एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। एमबीबीएस की पढ़ाई का पूरा खर्च भी संस्था ने दिया।

महज सपने देखने से नहीं, कड़ी मेहनत से ही मिलता है मुकाम
आर्थिकी तंगी से परेशान रहने वाले युवाओं को संदेश देते हुए डॉ. पिंकी ने कहा कि सपनों को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करें, मेहनत से ही सफलता मिलती है। कहा कि महज सपने देखने से ही लक्ष्य हासिल नहीं होते। डॉ. पिंकी का कहना है कि नीट की तैयारी के दौरान छह से सात घंटे तैयारी की। संस्था के हॉस्टल में पढ़ाई के अलावा वाल पेंटिंग की, वेब डिजाइनिंग, वेब स्टूडियो आदि प्रोजेक्ट्स पर काम किया । आज वह जहां पर भी है, संस्था के निदेशक जामयांग और शिक्षक निविता की बदौलत हूं, जिन्होंने माता-पिता का फर्ज निभाया।

रोजी-रोटी की तलाश में आए थे माता-पिता
डॉ. पिंकी के पिता कश्मीरी लाल राजस्थान के रहने वाले हैं, मां कृष्णा देवी पंजाब से हैं। कश्मीरी लाल और कृष्णा देवी रोजी-रोटी की तलाश में  जिला कांगड़ा का रुख किया। इतने पैसे नहीं थे कि धर्मशाला में किराया का कमरा ले पाते। ऐसे में चरान खड्ड के समीप झोपड़ी बनाकर यहां रहना शुरू किया। इस दौरान पिंकी हरयान के रूप में पहली बच्ची परिवार में आई। बाद में पिंकी ने अपनी मां के साथ भीख मांगना शुरू किया, जबकि पिता यहां दिहाड़ी-मजदूरी करते थे। 2015 में प्रशासन ने झोपड़ी वाली जगह को खाली करवा दिया। अब पिंकी का परिवार गांव चैतड़ू में एक किराये के मकान में रहता है।
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  • नाम: डॉ. पिंकी हरयान
  • जन्मतिथि: 16 दिसंबर 1999     
  • पिता: कश्मीरी लाल
  • माता: कृष्णा देवी
  • छोटी बहन: ममता (12वीं कक्षा)
  • छोटा भाई : नीरज (नौंवी कक्षा)
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