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Shimla News: कालीबाड़ी मंदिर में महिलाओं ने माता को शृंगार करके दी विदाई

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मंदिर के हॉल में सिंदूर खेला उत्सव देखने उमड़ी भीड़, दोपहर तीन बजे आईटीबीपी तालाब में मूर्तियों का विसर्जन
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ढोल नगाड़ों पर महिलाओं ने किया बंगाली नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कालीबाड़ी मंदिर में वीरवार को महिलाओं ने सिंदूर खेल उत्सव मनाया। महिलाओं ने सुबह 10:00 बजे पहले माता को सिंदूर लगाकर उनका शृंगार किया। इसके बाद दोपहर 3:00 बजे पांचों मूर्तियों को भव्य विदाई दी गई। मूर्तियों का विसर्जन आईटीबीपी के तालाब में किया गया।

मंदिर में पहले सुबह विधि-विधान से माता की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद मंदिर के हॉल में बंगाली परंपरा के अनुसार सुहागिन महिलाओं ने मां का बौरोन (शृंगार) और दर्पण (शीशे में मां के चरण देखना) किया। महिलाओं ने मां का सोलह शृंगार पान के पत्ते, आल्ता, सिंदूर, चूड़ियां, फूलों और गहनों से किया। सभी महिलाओं ने कतारों में खड़े होकर बारी-बारी माता को सिंदूर लगाया और फिर एक दूसरे को सिंदूर का टीका तथा चेहरे पर सिंदूर लगाया। इसके बाद सभी महिलाओं और अन्य भक्तों ने ढोल-नगाड़ों पर बंगाली पारंपरिक सामूहिक नृत्य किया तथा जयकारे लगाए। इस दौरान हॉल में बंगाली महिलाओं और स्थानीय महिलाओं ने बंगाल की पारंपरिक साड़ियां और शृंगार किए हुए नजर आईं।
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माता का विदाई समारोह मनाने के बाद दोपहर 2:00 बजे पांच मूर्तियों मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कार्तिकेय और कोला बहू (केले का पौधा) को मंदिर से विदाई दी गई। इसके बाद शाम को तारादेवी के पास स्थित आईटीबीपी तालाब में उलुलु ध्वनि मां के जयकारों के साथ इन मूर्तियों और कोलाबहू का विसर्जन किया गया। कालीबाड़ी मंदिर के पंडित मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया कि मां को हर्षोल्लास के साथ विदाई देने के बाद विधि-विधान के अनुसार विसर्जन किया गया। इसके बाद मंदिर में मिलन उत्सव (एकदूसरे के गले लगना) मनाया गया और माता को इस आशा के साथ विदाई दी गई कि अगले वर्ष दोबारा उनका आगमन होगा।
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