एशियाई खेलों में मैराथन में भारत के लिए पदक जीतकर हिमाचल का नाम रोशन करने वाले धावक सावन बरवाल इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि 44 साल बाद एशियाई खेलों की मैराथन में भारत के खाते में पदक आया है। यह उपलब्धि उनके लिए भी बेहद खास है। सावन ने कहा कि काफी अच्छा महसूस हो रहा है। जिस इवेंट में हिस्सा लेते हैं, उसमें अच्छा प्रदर्शन करने पर खुशी मिलती है। सावन ने बताया कि प्रतियोगिता से पहले उन्होंने करीब दो महीने अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रशिक्षण लिया। इस दौरान उन्हें दुनिया के कई अच्छे धावकों के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला।
उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावकों के साथ अभ्यास से उन्हें दौड़ की तकनीक, रणनीति और खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखने के बारे में काफी कुछ सीखने को मिला। अनुभवी एथलीटों ने उन्हें चैंपियनशिप रेस की रणनीति और दौड़ के दौरान अपनी गति और ऊर्जा को नियंत्रित करने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। प्रशिक्षण के दौरान सीखी इन बातों को उन्होंने प्रतियोगिता में आजमाया और इसका फायदा उन्हें रेस के दौरान मिला। सावन ने कहा कि अमेरिका में प्रशिक्षण का अनुभव उनके लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। सावन ने अपनी तैयारी में भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और केंद्र सरकार के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। सावन ने देश के युवाओं और एथलीटों से एथलेटिक्स में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया।