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यहां विसर्जित की जाएंगी अशोक सिंहल की अस्थियां

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विश्व हिंदू परिषद के पुरोधा एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के अस्थि कलश को गंगा और चंद्रभागा के पवित्र तांदी संगम में विसर्जित किया जाएगा। इससे पहले उनकी अस्थि कलश को दर्शन के लिए हिमाचल के कई हिस्सों में घुमाया जाएगा। इसके बाद 26 नवंबर को लाहौल स्पीति में बहने वाली चंद्रभागा नदी के तांदी संगम में उनकी अस्थियों को हिंदू और बौद्ध रीति अनुसार विसर्जित किया जाएगा।
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यह जानकारी विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन महामंत्री मनोज कुमार ने दी। उन्होंने कहा कि 23 नवंबर से अशोक सिंहल के अस्थि कलश को दर्शनों के लिए पूरे हिमाचल में स्थान-स्थान पर जनता के दर्शन के लिए लाया जाएगा। उनके मुताबिक इस सारे कार्यक्रम को लाहौल स्पीति के डॉ. चंद्रमोहन परशीरा के नेतृत्व में किया जाएगा।
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इसलिए पवित्र माना जाता हैं यहां अस्थि विसर्जन

डॉ. परशीरा हिमाचल विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर तैनात हैं। परशीरा ने बताया कि चंद्रभागा नदी का प्राचीन नाम असिक्नी है और यह अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक नदी है, जिसका वर्णन ऋग्वेद के नदी स्तुति सूत्र तथा शिव पुराण में गंगा-यमुना और सरस्वती नदियों के साथ आता है। सदियों से इस नदी में अस्तु विसर्जन को पवित्र माना जाता रहा है।

परशीरा ने कहा कि लाहौल स्पीति के लोगों के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है कि देश के इस धार्मिक और सामाजिक नेता अशोक सिंहल की अस्थियों के विसर्जन के लिए विश्व हिंदू परिषद ने लाहौल की इस पौराणिक नदी को चुना है। इससे तांदी संगम एक धार्मिक पर्यटन के तौर पर उभरेगा। प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज कुमार ने बताया कि अशोक सिंहल का अस्थि कलश विसर्जन देश में गंगा और चंद्रभागा में होगा।
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