सीमावर्ती इलाकों में सड़क नेटवर्क मजबूत करते हुए भारत ने चीन सीमा पर किलेबंदी शुरू कर दी है। भारत सरकार चीन सीमा से बेहद करीब समदो बॉर्डर तक 202 किमी लंबी ग्रांफू-समदो मार्ग को डबल लेन करेगी। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। तहसीलदार केलांग अनिल कुमार ने बताया कि भूमि अधिग्रहण को लेकर दो सप्ताह के भीतर इसकी फाइल सरकार और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंपी जाएगी।
इस मार्ग के डबल लेन बनने से समदो बॉर्डर तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। पारछू झील के खतरे से भी पार पा लिया जाएगा। सेना अभी तक इसे वैकल्पिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल करती थी लेकिन आने वाले दिनों में नियमित तौर पर इस्तेमाल करेगी। रोहतांग दर्रा पार करने के बाद लाहौल की तरफ लगभग 14 किमी के बाद ग्रांफू-समदो मार्ग मनाली-लेह सड़क से अलग हो जाता है। पारछू झील फटने के कारण करीब डेढ़ दशक पहले हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग किन्नौर में क्षतिग्रस्त हो गया था।
उस दौरान सेना ने समदो बॉर्डर तक पहुंचने को ग्रांफू-समदो मार्ग का इस्तेमाल किया था। 202 किमी लंबे ग्रांफू-समदो मार्ग को डबल लेन करने के लिए वन, राजस्व विभाग और बीआरओ की टीम भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में जुटी है। यह मार्ग करीब सात मीटर चौड़ा है। डबल लेन के लिए सड़क किनारे अतिरिक्त 13 मीटर चौड़ा जमीन का अधिग्रहण होगा। यह सड़क करीब 14 हजार फीट ऊंचे कुंजम दर्रा को पार कर गुजरती है। बीआरओ के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि ग्रांफू-समदो सड़क सुरक्षा के लिहाज से प्राथमिकता की सूची में शामिल है। इस मार्ग को डबल लेन बनाने की केंद्र से हरी झंडी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे।