कुछ दिन बाद अब सेना का काफिला चीन से सटे लेह-लद्दाख और पाकिस्तान से सटे कारगिल तक पहुंच पाएगा। बर्फबारी के चलते यह सड़क पिछले छह माह से बंद थी। बीआरओ ने 13 जून को सड़क को बहाल कर दिया था लेकिन, सेना ने हाल ही में इस मार्ग पर ट्रायल के लिए अपने वाहनों को भेजा है।
ट्रायल सफल होता है तो सेना का काफिला इस मार्ग से चीन और पाकिस्तान की सीमा के लिए रवाना हो जाएगा। सेना के लिए रसद भी इसी मार्ग से भेजा जाता है। ट्रायल की पुष्टि बीआरओ के 38 टीआरएफ दीपक प्रोजेक्ट के कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र ने की है।
उल्लेखनीय है कि देश की सुरक्षा की दृष्टि से 485 किमी लंबा मनाली-लेह मार्ग अति महत्वपूर्ण है। कारगिल युद्ध के दौरान भी यह मार्ग सेना के लिए अहम रहा था। इस मार्ग से भारी मात्रा में सेना के लिए रसद सीमा तक पहुंचाया गया था। पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि चीन भी लेह लद्दाख की ओर से कई बार घुसपैठ कर चुका है।
कर्नल केपी राजेंद्र ने कहा कि अभी सेना के वाहन मनाली लेह मार्ग पर ट्रायल के रूप में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना की ओर से इस मार्ग पर जो भी कमी बताई जा रही है, उसे दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही ट्रायल पूरा होगा, सेना की कानवाई यहां से जाना शुरू हो जाएगी।