एरेका पाम के सजावटी पौधे लोगों के फेफड़ों को खतरनाक गैसों से हानि पहुंचाने से रोक रहे हैं। ये बंद कमरों में पनपने वाली कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों को सोखकर वायु को शुद्ध करते हैं। यह खुलासा काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रिसोर्स टेक्नोलॉजी पालमपुर के विशेषज्ञों ने किया है। इन पौधों को हिमाचल प्रदेश में बंद कमरों के अंदर गमलों में रोपा जा रहा है।कोविडकाल में विशेषज्ञों भव्या भार्गव, संदीप मल्होत्रा, अंजली चंदेल, अंजली रकवाल, रचित, राघव कश्यप और संजय कुमार की टीम ने इस पर संयुक्त रूप से शोध किया है। इसे स्प्रिंगर नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छापा गया है। कोरोना वायरस के बीच ऑक्सीजन की कमी और फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह अच्छी खबर है। यह प्रयोग पालमपुर में किया गया है।
88.16 फीसदी तक घट गया खतरनाक गैसों का स्तर
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रिसोर्स टेक्नोलॉजी में स्थित चार प्राकृतिक हवादार प्रायोगिक स्थलों का चार माह के लिए उपयोग किया गया। एक से चार सप्ताह के लिए इन कमरों में कोई भी पौधा नहीं रखा गया। तीन पौधे 5 से 8 सप्ताह के लिए रखे गए। छह पौधे 9 से 12 सप्ताह के लिए रखे गए। नौ पौधे 13 से 16 हफ्तों के लिए रखे। परिणाम सामने आए कि इससे साइट चार में टीवीओसीएस, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर 88.16 फीसदी तक घट गया। इसी तरह से साइट तीन में यह स्तर क्रमश: 52.33 और 95.70 तक घट गया। इस शोध का निष्कर्ष यह निकला है कि गमले में रोपे गए एरेका पाम के पौधे प्रभावी लागत से युक्त, स्वविनियमन, स्थायी समाधान निकालने में कामयाब हुए। इससे बंद कमरे में वायु की गुणवत्ता बढ़ गई।