सितंबर में सत्ती का अध्यक्ष पद का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। ऐसे में संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने को मुख्यमंत्री जयराम भी जोर आजमाइश में जुट गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी तक संगठन पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के नजदीकियों का दबदबा था।
इसकी वजह से कई मौकों पर मुख्यमंत्री भी असहज स्थिति में थे, लेकिन केंद्र में मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही संगठन पर करीबी अमित शाह को बैठाकर सरकार संगठन में बेहतर तालमेल का फार्मूला हिमाचल में भी चल सकता है।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री अब संगठन में बदलाव के दौरान नए व युवा चेहरों और उनमें भी अपने गुट के नेताओं को कमान सौंपने की जुगत में लग गए हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री संगठन में होने वाले संभावित बदलाव में अपनी पकड़ कितनी मजबूत कर पाते हैं।