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हिमाचल में इस एक्ट के मुताबिक ही होगी शिक्षकों की भर्ती, मंत्री ने किया खुलासा

Fri, 06 Apr 2018 11:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने शिक्षकों की भर्ती को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा किया। प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके तहत ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। नए स्कूल भी अधिनियम के मुताबिक ही खोले जाएंगे।

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शिक्षकों की गैर शिक्षण कार्यों में भी ड्यूटी एक्ट के अनुसार ही लगाई जाएगी। वीरवार को विधानसभा में प्रारंभिक शिक्षा में स्कूलों की बढ़ती संख्या के बावजूद लगातार विद्यार्थियों की घटती संख्या और गिरते स्तर पर नीति बनाने के विषय पर गैर सरकारी सदस्य द्वारा लाए गए संकल्प प्रस्ताव का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने यह बात कही।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में बीते पांच साल के दौरान 22 फीसदी बच्चों ने सरकारी स्कूल छोड़े हैं। एससीईआरटी से इस संदर्भ में शिक्षा विभाग ने एक सर्वे करवाया है।
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सर्वे में सामने आया है कि अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं। निजी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चलती हैं। निजी स्कूलों की वर्दी के प्रति आकर्षण भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने का कारण बताया गया है। 

स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर शुरू किया अंग्रेजी मीडियम

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार कई जरूरी कदम उठा रही है। डाइट और एससीईआरटी को मजबूत किया जाएगा। स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाकर शिक्षकों की उपस्थिति को सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकारी स्कूलों में इस साल से स्मार्ट वर्दी शुरू की जा रही है। 454 स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर अंग्रेजी मीडियम शुरू किया है। बड़सर में 90 फीसदी शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। प्रदेश में खोले जाने वाले आदर्श विद्यालयों में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई करवाई जाएगी।

बच्चों को हास्टल सुविधा मिलेगी। खेलकूद गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उधर, संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए विधायक सुखराम चौधरी, कर्नल इंद्र सिंह, विक्रम जरियाल, जगत सिंह नेगी, मोहन लाल ब्राक्टा, सुभाष ठाकुर, सुंदर सिंह ठाकुर और रमेश धवाला ने सरकारी स्कूलों में किए जाने वाले बदलावों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।

सुझाव कम और ट्रांसफर केस ज्यादा
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि शिक्षा में सुधार लाने के लिए सरकार ने सभी से सुझाव आमंत्रित किए थे लेकिन सुझावों की संख्या नाममात्र है। अधिकांश लोग तो केवल ट्रांसफर केस को लेकर ही उनके पास आते हैं। उन्होंने सभी लोगों से सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए अपना योगदान देने का आह्वान किया।

क्लस्टर विश्वविद्यालय में शुरू होंगे 15 व्यावसायिक कोर्स

क्लस्टर विश्वविद्यालय विधेयक 2018 विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया है। क्लस्टर विवि मंडी के तहत 15 व्यावसायिक कोर्स शुरू होंगे। मंडी, द्रंग, बासा और सुंदरनगर कॉलेज इसके दायरे में लाए गए हैं। इनमें बैचलर, मास्टर डिग्री के साथ इंटिग्रेडिट और रिसर्च का काम भी होगा।

मंडी में स्थापित होने वाला क्लस्टर विवि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से भिन्न होगा। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने वीरवार को विस में क्लस्टर विश्वविद्यालय विधेयक 2018 पेश किया।

विधेयक के मुताबिक द्रंग कॉलेज में स्कूल ऑफ  ह्यूमैनेटिज, स्कूल ऑफ  लैंग्वेज, बासा कॉलेज में स्कूल ऑफ  टूरिज्म स्टडी, स्कूल ऑफ  लाइब्रेरी साइंस, सुंदरनगर कॉलेज में स्कूल ऑफ  अप्लाइड साइंस, स्कूल ऑफ  मैनेजमेंट स्टडी, स्कूल ऑफ  फार्मेसी कोर्स शुरू होंगे।क्लस्टर विवि का लीड कॉलेज मंडी होगा।

इसमें स्कूल ऑफ  लॉ, स्कूल ऑफ  इंजीनियरिंग, टेक्नालॉजी एंड कंप्यूटर टेक्नालॉजी, स्कूल ऑफ  परफॉमिंग आर्ट, लिबरल आर्ट्स व डिजाइनिंग, स्कूल ऑफ  टीचर एजूकेशन, स्कूल आफ  आर्किटेक्चरल व प्लानिंग, स्कूल ऑफ  जियो फिजिकल साइंस एंड एंथ्रोपोलॉजी, स्कूल आफ  मैनेजमेंट और स्कूल ऑफ  साइंस कोर्स शुरू होंगे।
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ऊना में क्लस्टर खोलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजेंगे : भारद्वाज

कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने विधेयक पेश करने के समय ऊना में भी क्लस्टर विवि स्थापित करने को लेकर सवाल उठाया। पूछा कि ऊना में भी क्लस्टर विवि खोलने की योजना थी।

वर्तमान में इसकी क्या स्थिति है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि ऊना में क्लस्टर विवि की योजना की उन्हें जानकारी नहीं है। ऊना में भी क्लस्टर विवि स्थापित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार ने क्लस्टर विवि का विधेयक जल्दबाजी में लाया है। बुधवार को विधेयक सदन में पेश किया गया। इस कारण इसकी पूरी जानकारी तक सदस्यों को नहीं है।

अच्छा होता कि पहले विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के समक्ष लाया जाता। उन्होंने कहा कि सरकार ने सौ दिनों के एजेंडे के चलते विधेयक लाने के लिए जल्दबाजी की है। पहले तो भाजपा रूसा का विरोध करती थी लेकिन सत्ता में आते ही रूसा की खूबियां नजर आने लग गई है।
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