फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: छह तह में बिक रहा सेब, दाम मिल रहे कम, बागवान मायूस

विज्ञापन
विज्ञापन
ग्राउंड रिपोर्ट
विज्ञापन

भट्ठाकुफर फल मंडी में यूनिवर्सल कार्टन के नियमों पर नहीं हो रहा पालन, खर्चा भी नहीं निकल रहा
प्रतिपेटी 30 फीसदी तक कम मिल रहे हैं दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले की भट्ठाकुफर फल मंडी में यूनिवर्सल कार्टन के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। फल मंडी में पांच तह की पेटियों की जगह छह तह वाली सेब की पेटियां बिक रही हैं। ऐसे में छोटे बागवानों को फसल के सही दाम नहीं मिल पा रहे।

भट्ठाकुफर फल मंडी में 70 फीसदी सेब गढ़ (आकार के हिसाब) में बिक रहा है, लेकिन 30 फीसदी सेब अभी भी गढ़ में बिकने की जगह दर के हिसाब से बेचा जा रहा है। मंगलवार को मंडी में यूनिवर्सल कार्टन में छह तह (लेयर) वाली पेटियां बिकने के लिए आई थीं जिनका वजन 22 से 24 किलो तक था। बागवानों का कहना है कि लदानी बोलते हैं कि पेटी में वजन देंगे तो अच्छे दाम मिलेंगे। इसलिए पांच तह वाली पेटी को 200 रुपये कम दाम मिल रहे हैं।
विज्ञापन


छह तह वाली पेटी का रेट भी 30 फीसदी कम दिया जा रहा है। इसके अलावा लार्ज, मिडियम, स्मॉल और एक्स्ट्रा स्मॉल सेब एक दाम पर बिक रहा है। भट्ठाकुफर फल मंडी में सेब बेचने आए कोटखाई के बागवान रोहन ने कहा कि पहले होल्डिंग प्वाइंट पर छराबड़ा में एक से दो घंटे तक सेब से लदे वाहन रोकते हैं। इसके बाद मंडी में गाड़ी पहुंचने पर जाम में भी करीब एक घंटे का समय लग जाता है। इसके बाद फसल के कम दाम मिलने पर बागवान का चेहरा उतर जाता है। बताया कि पहले ही इस वर्ष फसल बहुत कम है और उसके बाद अब दाम भी बेहतर न मिलने से नुकसान हो रहा है।


धरातल पर नहीं हो रहा नियमों का पालन
बागवानों का कहना है कि सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन शुरू तो कर दिया है, लेकिन धरातल पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है। एक हफ्ते में रॉयल सेब के दाम करीब 1,500 और रेड गोल्डन के दाम 500 से 1000 रुपये प्रति पेटी तक कम हो गए हैं। निचले इलाके का सेब मंडी में पहुंच रहा था तो उस दौरान कच्चे सेब के दाम भी तीन हजार से 3,600 रुपये प्रति पेटी तक मिल रहे थे। अब आढ़ती घाटे को पूरा करने के लिए मंडी में पहुंच रहे बेहतर गुणवत्ता वाले सेब के दाम भी कम दे रहे हैं। बागवान वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि मंडी में न तो गाड़ियां समय से लगती हैं और न तो फसल समय से बिकती है। दर के हिसाब से सेब बिकने पर बागवानों को नुकसान हो रहा है। इसलिए सेब गढ़ में ही बिकना चाहिए।


घाटे का सौदा बन रही बागवानी
बागवानी दिन प्रतिदिन घाटे का सौदा बनती जा रही है। भट्ठाकुफर फल मंडी में सेब पहुंचाने का इतना खर्चा है जिसमें सेब दिल्ली मंडी तक पहुंच सकता है। दर में सेब खरीदने से छोटे बागवानों को नुकसान हो रहा है।
-भोपाल मदैईक, बागवान, कोटखाई



खर्चे से कम मिल रहे हैं दाम
जितना हमारा खर्चा है उस हिसाब से मंडी में सेब नहीं बिक रहा है। इससे बागवानों को नुकसान हो रहा है। इस साल कार्टन का रेट भी बढ़ा है, जिसकी वजह से बागवानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
-फतेह सिंह, बागवान, करसोग (नेरी)



अंधकार में है बागवानों का भविष्य
आने वाले सालों में बागवानों का भविष्य अंधकार में है। इस साल बारिश की वजह से फसल खराब हो गई है। धूप कम लगने से सेब में रंग और आकार सही नहीं आ रहा है। बदलता मौसम घातक साबित हो रहा है।
विज्ञापन

-रोशन लाल चौधरी, बागवान, कोटखाई



ग्रेडिंग और पैकिंग में हो रहा ज्यादा खर्चा
मंडी में सेब की पेटी बिकने से ज्यादा ग्रेडिंग और पैकिंग में खर्चा हो जाता है। 220 रुपये में एक पेटी की पैकिंग हो रही है। वहीं मंडी में पहुंचाने तक परिवहन का खर्चा अलग से होता है। मंडी में कम दाम भी कम मिल रहे हैं।
ब्रृजलाल शर्मा, बागवान, रोहड़ू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें