क्वालिटी खरीद के लिए सुपरवाइजर रखे जाएंगे। परवाणू में सेब की बोली लगेगी। शिमला जिले के पराला में बड़ी और गांवों में छोटी सेब प्रोसेसिंग यूनिटें खुलेंगी। बागवानों को कार्टन भी देंगे। 31 मार्च, 2018 तक एचपीएमसी 86.55 करोड़ के घाटे में था। इस घाटे को दूर करने और सेब मार्केट का विस्तार करने के लिए निदेशक मंडल की बैठक में यह फैसले लिए गए।
निदेशक मंडल ने फैसला लिया कि दागी सेब की ढुलाई इस बार क्रेट में होगी। ओलावृष्टि से चौपाल, जुब्बल कोटखाई, रोहड़ू, करसोग और जंजैहली में काफी फसल दागी हुई है। क्रेट में सेब परवाणू तक पहुंचाकर खराब होने से बचाया जा सकेगा। इससे सेब के दाम अच्छे मिलेेंगे। परवाणू में होने वाली सेब की बिक्री के दौरान एचपीएमसी के वाइस चेयरमैन, एजीएम, जीएम सहित अन्य बड़े अधिकारी एक-एक दिन मौजूद रहेंगे। अभी 2.47 रुपये प्रति किलो के दाम पर यहां सेब बिकता है।
सब्सिडी लेने वाली प्रोसेसिंग यूनिटों से 15 को बैठक
बागवानी मंत्री ने बताया कि कई उद्योगों ने प्रदेश में सेब प्रोसेसिंग के लिए सब्सिडी ली है, लेकिन कच्चा माल बाहरी राज्यों से ले रहे हैं। ऐसे उद्योग संचालकों के साथ 15 जुलाई को बैठक होगी। इस सीजन में यह उद्योग कितना सेब उठाएंगे, इस बैठक में फैसला लेंगे।